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टीडीपी के पांच सांसद वेंकैया नायडू से मिले, अलग गुट के भाजपा में विलय को दी चुनौती

Fri, 21 Jun 2019 07:41 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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टीडीपी सांसद जयदेव दल्ला - फोटो : एएनआई
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तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के चार सांसदों ने गुरुवार को अपना इस्तीफा उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को सौंपते हुए टीडीपी के चार सांसदों के गुट ने भाजपा में विलय कर लिया था। इसे लेकर आज टीडीपी सांसद जयदेव गल्ला समेत पांच सांसद इस दलबदल को चुनौती देने के लिए वेंकैया नायडू से मिले। मुलाकात करने वाले सांसदों में दो राज्यसभा सांसद तो तीन लोकसभा सांसद हैं। 

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उपराष्ट्रपति नायडू से मिलने के बाद टीडीपी सांसद जयदेव गल्ला ने कहा कि कल टीडीपी के चार राज्यसभा सदस्यों ने एक पत्र दिया था जिसमें लिखा था कि वह राज्यसभा में अपने गुट का विलय कर रहे हैं और चूंकि उनके पास दो तिहाई बहुमत है, इसलिए इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।
गल्ला ने कहा कि इस पर विचार करने के बाद हम समझते हैं कि किसी राजनीतिक दल का विलय केवल संगठनात्मक स्तर पर होना चाहिए। अब चूंकि टीडीपी और भाजपा का संगठनात्मक स्तर पर विलय नहीं हुआ है तो यह वैध विलय नहीं है। 
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उन्होंने कहा कि हमने यही बात उपराष्ट्रपति के सामने स्पष्ट की। उन्होंने कहा है कि वह इसकी वैधताओं की समीक्षा करेंगे और कानून के अनुसार उचित कदम उठाएंगे। हमें इसका इंतजार करना है। हमने पत्र दे दिया है, हम संसदीय कार्य मंत्री को भी एक पत्र भेजेंगे। 
गुरुवार को टीडीपी के राज्यसभा सांसद टीजी वेंकटेश, वाईएस चौधरी, जीएम राव और सीएम रमेश अपना इस्तीफा सौंपकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। 

बता दें कि इस साल हुए लोकसभा चुनाव और राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में टीडीपी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। लोकसभा चुनाव में टीडीपी राज्य की 25 सीटों में से केवल तीन सीटें जीत सकी थी। वहीं, विधानसभा चुनाव में राज्य की 175 सीटों में से महज 23 सीटें टीडीपी के खाते में आई थीं। इसके उलट वाईएसआर कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लोकसभा चुनाव में 22 और विधानसभा चुनाव में 151 सीटों पर कब्जा जमाया था। 
 

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उच्च सदन में टूटने के कगार पर टीडीपी

राज्यसभा में तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) के चार सदस्यों के अपनी पार्टी से अलग होने के साथ ही उच्च सदन में पार्टी टूटने की कगार पर पहुंच गई है। राज्यसभा में छह सदस्यों वाली टीडीपी के चार सदस्य अलग गुट बनाकर भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। चार सदस्यों का समर्थन मिलने से उच्च सदन में बहुमत के संकट से जूझ रही भाजपा को राहत मिली है। भाजपा की अगुवाई वाले राजग के पास राज्यसभा में फिलहाल बहुमत नहीं है।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता वाली टीडीपी के राज्यसभा में छह सदस्य हैं और दलबदल विरोधी कानून के मुतबिक किसी दल से अलग हुए नए गुट को तभी मान्यता मिलेगी जबकि उसके दो तिहाई सदस्य इस गुट में शामिल हों। राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है। उच्च सदन में सर्वाधिक 71 सदस्यों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है।

इस साल हुए लोकसभा चुनाव और राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में टीडीपी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। लोकसभा चुनाव में टीडीपी राज्य की 25 सीटों में से केवल तीन सीटें जीत सकी थी। वहीं, विधानसभा चुनाव में राज्य की 175 सीटों में से महज 23 सीटें टीडीपी के खाते में आई थीं। इसके उलट वाईएसआर कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लोकसभा चुनाव में 22 और विधानसभा चुनाव में 151 सीटों पर कब्जा जमाया था। 
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