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Lancet Study: पांच बैक्टीरिया की वजह से भारत में गईं 6.8 लाख जानें, विश्व में हर आठवीं मौत के पीछे जीवाणु

Tue, 22 Nov 2022 02:05 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जीवाणु संक्रमण से मौतों की मुख्य वजह बनने वाले पांच बैक्टीरिया हैं- ई. कोली, एस. निमोनिया, के. निमोनिया, एस. ऑरियस और ए. बॉमनी। शोधकर्ताओं ने कहा कि 2019 में 77 लाख मौतें 33 सामान्य जीवाणु संक्रमणों के कारण हुईं। इन 33 में से पांच बैक्टीरिया आधी से ज्यादा मौतों की वजह बने। 

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आंतों के बैक्टीरिया (प्रतीकात्मक) - फोटो : Pixels
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विस्तार
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पांच बैक्टीरिया ने वर्ष 2019 में भारत में करीब 6.8 लाख भारतीयों की जान ले ली। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार 2019 में मौतों की दूसरी प्रमुख वजह बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण था। इस दौरान हर आठवीं मौत जीवाणुओं (Bacteria) से संक्रमित होने के कारण हुई। 

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जीवाणु संक्रमण से मौतों की मुख्य वजह बनने वाले पांच बैक्टीरिया हैं- ई. कोली, एस. निमोनिया, के. निमोनिया, एस. ऑरियस और ए. बॉमनी। शोधकर्ताओं ने कहा कि 2019 में 77 लाख मौतें 33 सामान्य जीवाणु संक्रमणों (common bacterial infections) के कारण हुईं। इन 33 में से पांच बैक्टीरिया आधी से ज्यादा मौतों की वजह बने। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे घातक बैक्टीरिया संक्रमण स्थान और उम्र के अनुसार अलग-अलग होते हैं। भारत में उक्त पांच बैक्टीरिया सबसे घातक पाए गए हैं। वर्ष 2019 में इन पांच के कारण ही 6,78,846 मौतें हुईं थीं। शोध के अनुसार 2019 में भारत में 1,57,082 (1.57 लाख) लोगों की मौत ई. कोली के कारण हुई। यह सबसे घातक बैक्टीरिया पाया गया।
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 2019 में विश्व में हृदय रोग के कारण सर्वाधिक मौतें हुईं, वहीं बैक्टीरिया के कारण होने वाली मौतों का स्थान दूसरा रहा। शोधकर्ताओं ने पाया कि बैक्टीरिया जनित 77 लाख मौतों में से 75 फीसदी से ज्यादा तीन सिंड्रोम के कारण हुईं। ये हैं- कम श्वसन संक्रमण (एलआरआई), रक्त प्रवाह संक्रमण (बीएसआई), और पेरिटोनियल और इंट्रा-पेट संक्रमण (आईएए)।

अध्ययन के सह लेखक क्रिस्टोफर मूर्रे ने पहली बार जीवाणु संक्रमण के कारण वैश्विक मानव स्वास्थ्य पर असर का अध्ययन किया गया है। उन्होंने कहा कि इन नतीजों पर वैश्विक स्वास्थ्य पहल की दृष्टि से विचार होना चाहिए, ताकि इन घातक जीवाणुओं से निपटने व मौतें कम करने के लिए कदम उठाए जा सकें। अब तक टीबी, मलेरिया व एचआईवी से होने वाली मौतों को लेकर ही ऐसे अध्ययन ज्यादा हुए हैं, लेकिन बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों व मौतों पर कम ध्यान दिया गया है। लैंसेट ने यह अध्ययन विश्व के 204 देशों में विभिन्न आयु व लिंग के लोगों पर किया था। 

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