भारत के पहले प्रधानमंत्री ने देश के विभाजन के बाद अपने अपने राष्ट्र को संबोधित किया था। जवाहर लाल नेहरू ने पार्लियामेंट में 14 अगस्त 1947 की आधी रात को जो भाषण दिया था उसे 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' (भाग्य के साथ वादा) कहा जाता है। नेहरू का वो भाषण 20 वीं सदी के 11 महानतम भाषणों में शामिल माना जाता है।
पाकिस्तान के कायद-ए- आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने भी कंस्टीट्यूट एसेंबली में 11 अगस्त 1947 को अपने देशवासियों को संबोधित किया था। आज जब दोनों देश 70 साल के हो चुके हैं। हमने जानने की कोशिश की क्या कहा था देश के जननायकों नें।
क्या कहा था जवाहर लाल नेहरू ने
जवाहर लाल नेहरू
वर्षों पहले, हमने नियति के साथ एक वादा (Tryst with Destiny) किया था, और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभाएं, पूरी तरह न सही पर बहुत हद तक तो निभाएं। आधी रात को जब पूरी दुनिया सो रही है, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग रहा है। ऐसे पल जिंदगी में या यूं कहें इतिहास में एक बार ही आता है।
आज हम दुर्भाग्य के एक युग का अंत कर रहे हैं और भारत फिर से खुद को खोज पाने के लिए आजाद है। आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वो महज एक कदम है, नए अवसरों के खुलने का। इससे भी बड़ी जीत और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं।
आज एक बार फिर वर्षों के संघर्ष के बाद, भारत जाग रहा है और स्वतंत्र है।
ये समय आराम करने या चैन से बैठने का नहीं है, बल्कि लगातार प्रयास करने का है। भारत की सेवा का मतलब लाखों पीड़ित लोगों की सेवा करना है। मतलब गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसर की असमानता को समाप्त करना होगा।
हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की महत्वाकांक्षा है कि हर आंख से एक-एक आंसू पोंछे जाएं। हो सकता है ये काम कठिन हो ये भी संभव है कि ये असंभव हो लेकिन हमें प्रतिज्ञा लेनी होगी कि जब तक पीड़ितों के आँसू खत्म नहीं हो जाते, तब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा।
भविष्य हमें बुला रहा है। हमें किधर जाना चाहिए और हमें क्या करना चाहिए, जिससे हम आम आदमी, किसानों और कामगारों के लिए आजादी और अवसर ला सकें, हम गरीबी, हम एक समृद्ध, लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील देश बना सकें। हम ऐसी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं को बना सकें जो हर आदमी-औरत के लिए जीवन की परिपूर्णता और न्याय सुनिश्चित कर सके।
कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके लोगों की सोच या काम संकीर्ण रहेगा।
क्या कहा था जिन्ना ने
जिन्ना और नेहरू
मुझे मालूम है कि भारत के विभाजन पंजाब और बंगाल के बंटवारे से सहमत नहीं हैं। लेकिन विभाजन होना ही था। जहां कहीं भी एक समुदाय बहुमत में है वहां दूसरा समुदाय अल्पसंख्यक समझी जा सकती है।
सरकार का सबसे पहला कर्तव्य कानून व्यवस्था को बनाकर रखना है ताकि देशवासियों की संपत्ति, जीवन और धार्मिक आस्थाओं की सुरक्षा की जा सके। याद रखें कि आप अब एक सार्वभौम विधायी निकाय हैं और आपके पास सभी शक्तियां हैं। इसलिए, आपके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि आप अपने फैसले कैसे लें।
हमारे देश के लिए सबसे बड़ा श्राप है हमारे देश में फैला रिश्वत और भ्रष्ट्राचार। मुझे नहीं पता भारत में भी कोई बड़ा श्राप है, लेकिन मुझे लगता है रिश्वत और भ्रष्टाचार की वजह से हमारी स्थिति बहुत खराब है। यह हमारे समाज में जहर की तरह फैला है।
ब्लैक मार्केटिंग हमारे देश के लिए एक अभिशाप है। खैर, मुझे पता है कि ब्लैक मार्किएटर अक्सर पकड़े जाते हैं और दंडित होते हैं। न्याय की बात की जाती है या कभी-कभी उनपर जुर्माना भी लगाया जाता है।