पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनावों के पहले चरण में सोमवार को बंपर वोट पड़े । दोपहर साढ़े तीन बजे तक असम में जहां 67 फीसदी वोट पड़े। वहीं, पश्चिम बंगाल में पांच बजे तक 79 फीसदी मतदान हुआ। चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि दूरदराज के मतदान केंद्रों से अब तक आंकड़े नहीं मिल सके हैं। ऐसे में मतदान का आंकड़ा बढ़ सकता है। असम में पहले चरण में राज्य की 126 में से 65 सीटों पर मतदान हुआ। राज्य के तमाम दिग्गज नेता इसी दौर में मैदान में थे। पश्चिम बंगाल में माओवाद प्रभावित जंगलमहल इलाके में भी लोगों ने भारी तादाद में मतदान किया। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।
पश्चिम बंगाल की 249 कुल सीटों में से जंगलमहल की सीटों सहित 18 सीटों पर मतदान हुआ। माओवादी प्रभावित जंगलमहल में हिंसा की तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए दो बजे तक 63 फीसदी से भी ज्यादा मतदान हो चुका था। इनमें सबसे ज्यादा 65.45 फीसदी मतदान पश्चिम मेदिनीपुर जिले की छह सीटों पर हुआ।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि लोगों ने विकास के पक्ष में मतदान किया है। दूसरी ओर, विपक्षी माकपा का दावा था कि यह वोट राज्य में बदलाव का संकेत है। इस दौरान ईवीएम खराब होने, विपक्षी दलों के एजेंटों को धमकाने और पत्रकारों के साथ मारपीट की भी छिटपुट घटनाएं हुईं, लेकिन कुल मिला कर मतदान शांतिपूर्ण रहा।
कांग्रेस की फिर बनेगी सरकार : गोगोई
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असम में पहले दौर की 65 सीटों के लिए कुल 539 उम्मीदवार मैदान में थे। कांग्रेस ने इन तमाम सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जबकि भाजपा 54 सीटों पर चुनाव लड़ी। उसके सहयोगियों अगप ने 11 और बीपीएफ ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा। बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ ने भी 27 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। राज्य के मुख्यमंत्री और सरकार के स्वरूप का फैसला भी पहले दौर के मतदान से ही होना है।
सोमवार को जिन प्रमुख लोगों की किस्मत मतपेटियों में कैद हुईं हैं, उसमें मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के अलावा भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सर्बानंद सोनोवाल, असम गण परिषद (अगप) अध्यक्ष अतुल बोरा, पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत, विधानसभा अध्यक्ष प्रणब बोरा और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन सिंह घटवार प्रमुख हैं। दोपहर दो बजे तक इन सीटों पर लगभग 51 फीसदी वोट पड़े थे। बांग्लादेश की सीमा से सटी उस बराक घाटी की 15 सीटों के लिए भी वोट पड़े, जिनकी सरकार के गठन में अहम भूमिका होगी।
पश्चिम बंगाल की पहले चरण में जंगलमहल इलाके की सीटों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की साख दांव पर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता व उनकी पार्टी को यहां कितनी सीटें मिलती हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि 18 सीटों में से माओवादी गतिविधियों वाले इलाके में स्थित 13 सीटों को बेहद संवेदनशील श्रेणी में रखा है। वहां मतदान तय समय से दो घंटे पहले चार बजे ही खत्म हो गया। बाकी सीटों पर यह प्रक्रिया शाम छह बजे तक जारी रही।
मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने वोट डालने के बाद दावा किया कि राज्य में अगली सरकार कांग्रेस की ही बनेगी। दूसरी ओर, भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि लोगों ने राज्य में बदलाव के पक्ष में भारी तादाद में मतदान किया है। उन्होंने राज्य में भाजपा सरकार के सत्ता में आने का दावा किया।