शंघाई सहोयग संगठन के सदस्य एवं सहयोगी देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों, आधिकारिक प्रतनिधियों, निर्यात और आयात करने वालों सहित आयुष सेक्टर से जुड़े संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बुधवार को कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तहत गुवाहाटी में होने वाले पहले पारंपरिक चिकित्सा सम्मेलन में 17 देशों के 150 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
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बीटूबी कॉन्फ्रेंस एवं पारंपरिक चिकित्सा पर यह एक्सपो भारत के लिए शंघाई सहयोग संगठन के देशों के बीच आयुष सेक्टर को आगे ले जाने और इन देशों के बीच आ रही चुनौंतियों से पार पाने का एक मंच होगा। केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल गुरुवार को इस बीटूबी कॉन्फ्रेंस एवं एक्सपो का उद्घाटन करेंगे।
17 देशों के स्वास्थ्य मंत्री और प्रतिनिधि होंगे शामिल
शंघाई सहोयग संगठन के सदस्य एवं सहयोगी देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों, आधिकारिक प्रतनिधियों, निर्यात और आयात करने वालों सहित आयुष सेक्टर से जुड़े संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो रहे हैं।
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आयुष मंत्रालय की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक चार दिवसीय यह आयोजन शंघाई सदस्य और सहयोगी देशों की आर्थिकी को मजबूत करने वाला और देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र में परंपर समन्वय को बढ़ाने वाला साबित होगा। पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में नियामकों, व्यापार का नेतृत्व करने वालों के लिए एक अवसर लेकर आएगा और एससीओ देश पारंपरिक चिकित्सा के विभिन्न आयामों, उत्पादों, सेवाओं, शिक्षा, कौशल-विकास, सौंदर्य एवं औषधीय विकास आदि को लेकर आपस में विचार-विमर्श करेंगे।
कई मामलों में सहमति बनने की संभावना
यह आयोजन पारंपरिक चिकित्सा को लेकर एससीओ देशों के विशेषज्ञ कार्यकारी समूह की दिल्ली में पिछले महीने ही हुई बैठक के तुरंत बाद हो रहा है। इससे बीटूबी कॉन्फ्रेंस एवं एक्सपो का महत्व और अधिक बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि एसओसी देशों के समरकंद (उज्बेकिस्तान) में आयोजित 22वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित कार्यकारी विशेषज्ञ समूह का गठन हुआ है। गुरुवार से शुरू होेने वाले इस आयोजन में पहले दिन एसीओ सदस्य देशों एवं अन्य पक्षों के बीच पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित अलग-अलग आयामों को लेकर आपस में विस्तृत बातचीत होगी। नीति नियंताओं और व्यापारिक संगठनों के साथ ही उत्पादकों एवं अन्य पक्षों के बीच कई मामलों को लेकर सहमति बनने की संभावना है।