भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता शहर में एशिया का पहला एपिस्कोपल चर्च स्थित है। यह ऐसा पहला चर्च है जो किसी संत के नाम पर बनाया गया। सेंट पॉल कैथेड्रल नाम के इस चर्च के अंदरूनी हिस्से में पवित्र कर्मों का चित्रण किया गया है। इसकी आधारशिला 1839 में रखी गई थी और इसका निर्माण कार्य 1847 में संपन्न हुआ।
यह चर्च गोथिक शैली की वास्तुकला में बनी ईमारतों में से सबसे बेहतरीन है। इसका निर्माण कोलकाता में यूरोपियों की बढ़ती संख्या के दौरान किया गया था। इसका एक कारण ये भी था कि उस समय मौजूद सेंट जॉन चर्च छोटा पड़ रहा था। चर्च को दो बार भूकंप आने के कारण नुकसान भी हुआ लेकिन बाद में इसकी मरम्मद कराई गई।
सात एकड़ क्षेत्रफल में बने इस चर्च के शुभारंभ के समय रानी विक्टोरिया ने चर्च के लिए 10 चांदी की प्लेटें भेजी थीं। यहां बिशप हेबर की मूर्ति आकर्षण का मुख्य केंद्र है और इसका शिखर 201 फीट ऊंचा है। बता दें हेबर कोलकाता के दूसरे बिशप थे। यहां दुनियाभर से लोग दर्शन के लिए आते हैं।
इस ऐतिहासिक चर्च का डिजाइन अंग्रेजी वास्तुकार मेजर डब्ल्यू एन फोर्बेस ने तैयार किया था। चर्च का वातावरण बेहद शांत है। इसे बनाने में 4.35 लाख रुपये खर्च किए गए थे। यहां एक साथ 1000 लोग प्रार्थना कर सकते हैं।