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असम-अरुणाचल सीमा विवाद: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पेड़ लगाने गए थे लोग; फायरिंग में दो की मौत, तीन घायल

Mon, 05 Jun 2023 07:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

पुलिस अधीक्षक रंजन भुइयां ने बताया कि स्थानीय लोगों ने विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्र में वृक्षारोपण अभियान की व्यवस्था की थी। सुबह सात ग्रामीण व्यवस्था करने के लिए पहले ही चले गए थे।
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असम-अरुणाचल सीमा क्षेत्र में गोलीबारी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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असम के धेमाजी जिले में अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर सोमवार को कथित गोलीबारी पर गोलीबारी हुई। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य लापता हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। 

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पुलिस अधीक्षक रंजन भुइयां ने बताया कि स्थानीय लोगों ने विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्र में वृक्षारोपण अभियान की व्यवस्था की थी। सुबह सात ग्रामीण व्यवस्था करने के लिए पहले ही चले गए थे। वे कथित तौर पर गोलीबारी की चपेट में आ गए, जिसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई।
 

उन्होंने बताया कि तीन अन्य लोग गोली लगने से घायल हो गए और उन्हें स्थानीय लोगों द्वारा धेमाजी सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां एक व्यक्ति की मौत हो गई। भुइयां ने बताया कि तीन अन्य लापता हो गए और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

उन्होंने कहा, सूचना मिलने के बाद हमारी टीम मौके पर पहुंची। हम घटना की जांच कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने अरुणाचल प्रदेश के उपद्रवियों की संलिप्तता का आरोप लगाया, क्योंकि क्षेत्र में अंतर-राज्यीय सीमा को लेकर विवाद है। असम और अरुणाचल प्रदेश 804 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं और दोनों पक्ष सीमा विवादों को हल करने के लिए चर्चा कर रहे हैं।
 

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 20 अप्रैल को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सीमा विवाद को हल करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। पिछले साल जुलाई में दोनों मुख्यमंत्रियों ने सीमा विवादों को हल करने के प्रयासों को गति देने के लिए 'नामसाई घोषणा' पर हस्ताक्षर किए थे। 
 
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अरुणाचल प्रदेश को 1972 में एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। उसका दावा है कि मैदानी इलाकों में कई वनाच्छादित इलाके जो पारंपरिक रूप से पहाड़ी आदिवासी प्रमुखों और समुदायों के थे, उन्हें एकतरफा असम में स्थानांतरित कर दिया गया था। 1987 में अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा मिलने के बाद एक त्रिपक्षीय समिति नियुक्त की गई थी जिसने सिफारिश की थी कि कुछ क्षेत्रों को असम से अरुणाचल प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया जाए। असम ने इसका विरोध किया और मामला सुप्रीम कोर्ट में रहा है।

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