महाराष्ट्र में नागपुर के पुलगांव स्थित सेना के सबसे बड़े हथियार डिपो में आग लगने से दो अधिकारियों सहित 17 लोगों की मौत हो गई है। इस मामले में ले. जनरल टी डेकोना, पूर्व महानिदेशक, आर्डिनेंस ने अमर उजाला संवाददाता शशिधर पाठक से बातचीत में कहा कि प्रथमदृष्टया जो जानकारी मिल रही है, उससे साफ है कि जब आग लगी तो आयुध डिपो बंद था। यानी कोई गोला-बारूद ले जाने या फिर किसी गतिविधि (हैंडलिंग) के दौरान यह हादसा नहीं हुआ। दूसरा यह कि पुलगांव में 15 स्थायी शेड हैं और उनमें से सिर्फ एक ही शेड में आग लगी। यह फैलकर दूसरे शेड तक नहीं पहुंची। इसकी एक वजह एक शेड के बाद खड़ी की गई मिट्टी की दीवार और अन्य उपाय हो सकती हैं। वहां एक शेड में 400 टन ही गोला-बारूद या हथियार हैं, इसलिए इससे अधिक का नुकसान नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि अब यह बात अलग है कि जिस शेड में आग लगी, उसमें हथियार (आयातित, स्वदेशी या फिर अपनी आयु पूरी कर चुके) रखे थे। लेकिन घटना को देखते हुए, आग को लेकर किसी साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मैं खुद पुलगांव डिपो में भी तैनात रहा हूं। डिपो में आग लगने की जांच में शामिल रहा हूं। अभी तक टीवी पर आ रही खबरों से यही लग रहा है कि जब आग लगी तो वह बहुत भयानक नहीं थी। इसलिए फायर फाइटिंग सदस्य और क्विक रिस्पांस टीम वहां पहुंची। उसने आग बुझाने के उपाय शुरू ही किए थे कि अचानक विस्फोट हो गया। यही वजह है कि इस डिपो में आग लगने के बाद इतने अधिक लोग मारे गए और घायल हुए। आप देखेंगे तो पाएंगे कि अभी तक किसी भी आयुध डिपो में आग लगने से इतने सैन्य कर्मी और आग बुझाने वाले कर्मी उसकी चपेट में नहीं आए हैं। इसलिए यह हादसा काफी कुछ इशारा भी कर रहा है। सेना ने जांच शुरू कर दी है और मुझे उम्मीद है कि जांच अधिकारी, खुफिया एजेंसी के लोग इसका पता लगा लेंगे।
डेकोना ने कहा कि ऐसा नहीं है कि आग लगाने की साजिश नहीं होती। लालगढ़ जट्टा डिपो में यही कारण था। एक डंप से आग लगी और दूसरे में फैल गई थी। सौ डंप जलकर खाक हो गए थे। भरतपुर डिपो में आग लगने का कारण कुछ और था। दरअसल पहले 60 प्रतिशत गोला-बारूद डिपो क्षेत्र में खुले में तिरपाल आदि से ढक कर रखे होते थे। तब आग आसानी से लग जाती थी। अब 90 प्रतिशत गोला-बारूद स्थायी पक्के डिपो में रखे हैं। इसलिए अब इसकी संभावना काफी कम है। इस आग का कारण भी जांच नतीजे के बाद ही सामने आएगा।
ले. जनरल रणवीर सिंह, महानिदेशक, सैन्य आपरेशनल महानिदेशालय (डीजीएमओ), भारतीय सेना ने बताया कि पुलगांव स्थित सेना के सबसे बड़े हथियार डिपो में आग लगने की सूचना मिलते ही फायर फाइटिंग (दमकल कर्मी) टीम और क्विक रिएक्शन टीम ने तत्काल इस पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए। यह डिपो करीब 7,000 एकड़ में फैला है। फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है। यह केवल एक ही शेड (डंपिंग यार्ड) तक केंद्रित है और इसमें अति संवेदनशील हथियार रखे हुए थे।