बता दें कि वित्त मंत्रालय का स्टाफ कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जारी की गई गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहा है, यह बात मंत्रालय में टॉप लेवल तक पहुंच गई थी। मंत्रालय के भीतर और उसके आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज में भी कुछ अधिकारी और कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करते हुए दिखाई पड़े थे। इसके बाद नॉर्थ ब्लॉक के अलावा दूसरी जगहों पर स्थित मंत्रालय की अन्य शाखाओं में भी औचक निरीक्षण किया गया। वहां भी पूरी तरह से नियमों का पालन नहीं हो रहा था। इसके बाद मंत्रालय ने सख्ती दिखाते हुए सभी कार्मिकों के लिए नए आदेश जारी कर दिए हैं। इनके तहत यदि कोई कार्मिक मास्क लगाने, सैनिटाइजेशन और सामाजिक दूरी जैसे नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नॉर्थ ब्लॉक के अलावा मंत्रालय की सभी शाखाओं में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। उसमें यह देखा जा रहा है कि वे कैमरे सही हालत में हैं या नहीं। अगर कोई कैमरा खराब है तो उसे ठीक कराया जा रहा है। अब सीसीटीवी फुटेज में जो कोई भी कार्मिक कोविड गाइडलाइंस का उल्लंघन करता हुआ दिखाई पड़ेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों ने वर्क फ्रॉम होम की नीति लागू की है। अधिकांश कार्यालयों में 50 फीसदी स्टाफ से काम चलाया जा रहा है। अंडर सेक्रेटरी और उससे नीचे के स्तर के अधिकारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई है। कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है। जो अधिकारी कोरोना संक्रमण के कंटेनमेंट जोन में रहते हैं, उन्हें कार्यालय आने से छूट प्रदान की गई है।
कोविड-19 के संक्रमण में हाल में आई तेजी के मद्देनजर, डीओपीटी ने पिछले दिनों एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था, जिसमें 45 वर्ष से अधिक उम्र के सभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे अपना टीकाकरण करवाएं। इससे कोविड-19 के प्रसार को प्रभावी रूप से रोकने में मदद मिलेगी। सरकारी कर्मचारियों को टीकाकरण के बाद भी कोविड-19 से जुड़े उचित व्यवहार का पालन करते रहने की सलाह दी गई थी। हाथों की लगातार धुलाई/सैनिटाइजेशन/मास्क/फेस कवर पहनना और सामाजिक दूरी का पालन करने जैसी हिदायतों से कर्मियों को अवगत कराया गया।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों की सरकारों से भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों/सलाह को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा, केवल सरकारी अधिकारियों की भलाई के लिए ही नहीं, बल्कि कोविड-19 के कारण बीमार पड़ने वाले सरकारी कर्मचारियों के चलते होने वाले कामकाज के दिन संबंधी नुकसान को कम करने के लिए भी यह जरूरी है।