चेन्नई में शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में शामिल नहीं होने का निर्णय इसलिए लिया था, क्योंकि इसके तहत दिया जा रहा प्रस्ताव हमारी अपेक्षाओं (व्यापारियों व किसानों के संरक्षण) पर खरा नहीं उतर रहा था।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बैंक खाता धारकों के हितों को और ज्यादा सुरक्षित करने के लिए सरकार नियामक तंत्र में ज्यादा सुधार के लिए जुटी हुई है।
सीतारमण ने छठे जी. रामचंद्रन स्मृति व्याख्यान में कहा कि लंबे समय तक मोलभाव करने के बावजूद कुछ खास सेक्टरों में आरसीईपी प्रस्ताव के अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने के कारण ही भारत ने इसमें शामिल नहीं होने का निर्णय लिया।
बता दें कि आरसीईपी 10 आसियान देशों (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, लाओस और वियतनाम) तथा उनके छह एफटीए साझीदार देशों (चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) की मौजूदगी वाला समूह है।
इस समूह के बैंकाक में 4 नवंबर को हुए शिखर सम्मेलन में 15 सदस्य देशों ने 2020 तक आपसी मुक्त व्यापार के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की सहमति दे दी थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय हितों के संरक्षण के लिए इसमें शामिल नहीं होने का निर्णय लिया था।
पीएमसी बैंक घोटाले पर सीतारमण ने कहा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपने ढांचे में सुधार के लिए कई कदम उठा रहा है, जो सुपरवाइजरी और नियामक के रूप में उसकी भूमिका को और ज्यादा मजबूत करेंगे। साथ ही आरबीआई को और ज्यादा सशक्त करने के लिए हम भी कुछ विधायी परिवर्तन या संशोधन करने जा रहे हैं।
उन्होेंने कहा कि हम यह सब बातें इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि बाजार और बैंकों के बेहतर विनियमन के लिए ऐसे उपायों की आवश्यकता है। वित्त मंत्री ने भारतीय व्यापारियों की समस्याओं को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की भी चर्चा की। इसमें उन्होंने खासतौर पर हाल ही में कम किए गए कॉरपोरेट टैक्स का जिक्र किया।