पिछले कुछ महीनों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रिकॉर्ड संग्रह पर वित्तमंत्री ने खुशी का इजहार किया। उन्होंने कहा कि जीएसटी को लागू हुए चार साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान सरकार ने इस कर ढांचे को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने एसएमएस के जरिये शून्य रिटर्न दाखिल करना, छोटे करदाताओं के लिए मासिक भुगतान और तिमाही रिटर्न भरने की छूट, इलेक्ट्रॉनिक चालान प्रणाली, संशोधन करने योग्य जीएसटी रिटर्न आदि कुछ उपाय गिनाए।
उन्होंने कहा कि जीएसटीएन प्रणाली का दायरा बढ़ाया गया है। इसके साथ ही कर चोरी करने वालों और फर्जी बिल बनाने वालों का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली गई है। जिसके सुखद परिणाम मिले हैं। उन्होंने कहा, परिषद की चेयरमैन होने के नाते हम सदन को आश्वस्त करना चाहते हैं कि जीएसटी को और आसान बनाने के लिए आगे भी हर संभव कदम उठाएंगे और खामियों को दूर करेंगे।
सरकारी बैंकों को 20,000 करोड़ का बूस्टर डोज
सरकार ने बैंकिंग सेक्टर में जान फूंकने के लिए मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 20,000 करोड़ रुपये दिए थे। साथ ही कहा कि सरकार बैंकों का वित्तीय स्वास्थ्य ठीक करने के लिए 20,000 और देगी।
दरअसल सितंबर 2020 में संसद ने 2020-21 की पूरक मांगों की पहली किस्त के तौर पर बैंकों के पूंजीकरण के लिए 20,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। वहीं वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार ने अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए बैंकों को 70,000 करोड़ रुपये दिए थे ताकि वह लोन दे सकें। जबकि सरकार ने 2018-19 में बैंकों को 1.06 करोड़ रुपये दिए थे।