देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में 29 ऐसी विशिष्ट उधारकर्ता कंपनियां हैं, जिन्हें नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। प्रत्येक का बकाया 1000 करोड़ रुपये व इससे अधिक है। इन खातों में समग्र बकाया 61027 करोड़ रुपये था। वित्तीय वर्ष 2014-15 में बट्टे खाते में डाली गई कुल अनर्जक आस्तियां (एनपीए) 58786 करोड़ रुपये थी। बड़े उद्योग और सेवाओं के संबंध में बट्टे खाते में डाली गई अनर्जक आस्तियां 31723 करोड़ रुपये थी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में बट्टे खाते में डाली गई कुल अनर्जक आस्तियां (एनपीए) 216324 करोड़ रुपये थी। इस अवधि के दौरान बड़े उद्योग और सेवाओं के संबंध में बट्टे खाते में डाली गई अनर्जक आस्तियां 114528 करोड़ रुपये थी। वित्तीय वर्ष 2023-24 में बट्टे खाते में डाली गई कुल अनर्जक आस्तियां 170270 करोड़ रुपये थी। इस अवधि के दौरान बड़े उद्योग और सेवाओं के संबंध में बट्टे खाते में डाली गई अनर्जक आस्तियां 68366 करोड़ रुपये थी।
संसद की कार्यवाही के दौरान सोमवार को लोकसभा सदस्य अमरा राम ने वित्त मंत्री से पांच सवाल पूछे थे। पहला सवाल, विगत दस वर्षों के दौरान बड़े कॉरपोरेट घरानों की ऐसी ऋण राशि का कंपनीवार ब्यौरा क्या है, जिसे बट्टे खाते में डाला गया है। दूसरा सवाल, औद्योगिक इकाइयों को पांच हजार करोड़ रुपये तक संवितरित बकाया ऋण राशि का कंपनीवार ब्यौरा क्या है। तीसरा सवाल, उक्त बकाया राशि की वसूली के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। चौथा, देश में ऐसी कितनी फर्म और कंपनियां हैं, जिनके संबंध में एक हजार करोड़ रुपये या उससे अधिक की एनपीए ऋण राशि देय है। तत्संबंधी एनपीए ब्यौरा क्या है। पांचवां सवाल, विगत दस वर्षों के दौरान कितनी कंपनियों के संबंध में ऋण की राशि बट्टे खाते में डाली गई है तथा तत्संबंधी कंपनीवार और राशिवार ब्यौरा क्या है।