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Nirmala Sitharaman: क्या भारत के निर्यात को मिलेगी रफ्तार? US टैरिफ में कटौती पर वित्त मंत्री ने कही ये बात

Tue, 03 Feb 2026 05:05 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अमेरिका द्वारा टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना भारत के लिए बड़ी सकारात्मक खबर है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है। इससे भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा। आइए विस्तार से जानते हैं इस पर उन्होंने क्या कुछ कहा।
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निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका द्वारा टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद भारतीय निर्यात को गति मिलेगी और कारोबार बढ़ेगा। इससे निर्यातकों को सीधा फायदा होगा और व्यापार माहौल मजबूत होगा।
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वित्त मंत्री ने साफ कहा कि टैरिफ में कटौती भारतीय निर्यातकों के लिए शुभ संकेत है। उनके मुताबिक पहले भारी टैरिफ की वजह से भारतीय सामान की कीमत अमेरिका में ज्यादा हो गई थी, जिससे ऑर्डर कम हुए और प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ी। अब शुल्क घटने के बाद भारतीय उत्पाद फिर से प्रतिस्पर्धी बनेंगे और निर्यात बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि निर्यातकों ने इस बीच नए बाजार भी खोजे हैं, जिससे आगे और मजबूती मिलेगी।

वित्त मंत्री ने टैरिफ घटाने को क्यों बताया शुभ संकेत?
वित्त मंत्री ने कहा कि अमेरिका का टैरिफ घटाने का फैसला निर्यातकों के लिए अच्छा संकेत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब भारत से होने वाला निर्यात बढ़ेगा। उनका कहना है कि निर्यातक पहले ही नए देशों के बाजारों में भी पहुंच बना चुके हैं। ऐसे में अमेरिकी बाजार में राहत मिलने से कुल निर्यात पर सकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समझौते का विस्तृत ब्योरा जल्द सामने आएगा।
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सीतारमण ने बताया टैरिफ घटने से कितना फायदा?
  • भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
  • इससे भारत का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।
  • ये निर्यातकों के लिए एक अच्छा संकेत है।
  • भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
  • अब अमेरिका में और भी ऑर्डर बढ़ सकते हैं।
  • इसका फायदा खास तौर पर निर्यात सेक्टर को मिलेगा।


नई दर से भारत को प्रतिस्पर्धा में क्या फायदा?
नई 18 प्रतिशत टैरिफ दर भारत को एशिया के कई प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर या उनसे बेहतर स्थिति में ला सकती है। कुछ देशों पर अभी भी 20 प्रतिशत के आसपास शुल्क है। ऐसे में भारत के उत्पाद अमेरिकी बाजार में दाम के लिहाज से बेहतर विकल्प बन सकते हैं। कपड़ा, जूते, जेम्स-ज्वैलरी और लेदर जैसे सेक्टर को खास राहत मिलने की उम्मीद है। इससे ऑर्डर फ्लो और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं।

पहले 50% टैरिफ से कितना पड़ा था असर?

  • स्टील और एल्युमिनियम निर्यात के ऑर्डर में गिरावट आई थी।
  • टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सामान की मांग घटी थी।
  • कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात ऑर्डर भी कम हुए थे।
  • अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों की ओर चले गए थे।
  • भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे पड़ने लगे थे।
  • आर्यातकों का मुनाफा (मार्जिन) घट गया था।
  • राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भारत की पकड़ कमजोर हुई थी।
  • श्रम आधारित उद्योगों को सबसे ज्यादा झटका लगा था।

समझौते की शर्तें और आगे की राह क्या?
सरकार के अनुसार यह टैरिफ कटौती एक व्यापक व्यापार समझौते का हिस्सा है। इसके तहत भारत कुछ व्यापार बाधाएं घटाएगा और अमेरिका से ऊर्जा समेत कई उत्पादों की खरीद बढ़ा सकता है। पहले अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क भी लगाया गया था, जो अब हट गया है। इससे कुल प्रभावी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत रह गया है। सरकार का मानना है कि इससे निर्यात, निवेश और व्यापार भरोसा तीनों को मजबूती मिलेगी।
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