जिस दिन एमके स्टालिन का जन्म हुआ था, उस दिन उनके पिता और डीएमके के उभरते हुए नेता जोसेफ स्टालिन की सांत्वना सभा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। जब उन्हें किसी ने उनकी दूसरी पत्नी दयालु अम्माल से हुए दूसरे बेटे के बारे में बताया। करुणानिधि ने तुरंत उसका नाम सोवियत कम्युनिस्ट नेता के नाम पर रखा। करुणानिधि के करीबी दोस्त एम नागानाथन, जो यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास में पढ़ाते हैं, वह पिछले 25 सालों तक डीएमके के नेता के साथ सुबह की सैर पर जाया करते थे।
एम नागानाथन ने बताया कि जब भी वह
करुणानिधि से स्टालिन को अपनी बागडोर सौंपने के बारे में कहते, कलाईगनर कहते, 'मैं किसी का समर्थन नहीं करता, वह खुद अपने लिए कार्य करेंगे और बढ़ेंगे। बिलकुल माओ की तरह।' माओ जेडोन्ग चीन के कम्युनिस्ट नेता थे। माओ ने किसी का नाम उत्तराधिकारी के लिए तय नहीं किया था। लेकिन उसी समय कलाईगनर को यह मालूम था कि उनका बेटा सक्षम है और स्टालिन की इसके लिए उन्होंने प्रशंसा भी की थी।
इस तरह करुणानिधि जिन्होंने 1940 और 50 के दशक में तमिल सिनेमा को कुछ बेहतरीन फिल्में दी हैं। उन्होंने अपरंपरागत तौर पर
स्टालिन को राजनीति में प्रवेश करवाया और फैसला किया कि वह कब पार्टी को संभालेंगे। मई 2016 में विधानसभा चुनाव के दौरान जब स्टालिन ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध एक अभियान चलाकर खुद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया तो करुणानिधि ने कहा, 'स्टालिन मुख्यमंत्री बन सकते हैं अगर प्रकृति ने मुझे कुछ कर दिया तो।'
जनवरी 2017 में जब 93 साल के करुणानिधि बीमार पड़ गए तो पार्टी की उच्चस्तरीय समिति ने स्टालिन को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। 7 अगस्त को 94 साल के करुणानिधि की मौत के बाद स्टालिन के पास अब बिना किसी विरोध के पार्टी की कमान आ गई है। एक वीआईपी बच्चा होने के बावजूद स्टालिन को अध्यक्ष बनने के लिए लंबा समय इंतजार करना पड़ा। अपने पांच दशक के लंबे करियर की शुरुआत स्टालिन ने छात्र प्रचारक के तौर पर 1967 चुनाव में की थी। साल 2006-11 के बीच अपने पिता के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने उप-मुख्यमंत्री का पद संभाला था।