उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन बनाते वक्त सोचा कि लोगों को कुछ ऐसा दिया जाए, जो हर संदर्भ में भारतीय हो। खासतौर पर बी और सी श्रेणी शहरों के दर्शकों को उनके पसंद की फिल्म देना मकसद था।
मशहूर फिल्मकार आनंद राय ने कहा कि हिंदी फिल्में दर्शकों से जुड़ नहीं पा रही हैं। इसी वजह से बड़ी-बड़ी फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही हैं। अपनी फिल्म रक्षाबंधन का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे बनाते समय जरूरत से ज्यादा होशियारी दिखाई। इसी का नतीजा भुगतना पड़ा। यहां दर्शकों को समझने में गलती कर दी। आनंद राय 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव में शामिल हुए थे।
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उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन बनाते वक्त सोचा कि लोगों को कुछ ऐसा दिया जाए, जो हर संदर्भ में भारतीय हो। खासतौर पर बी और सी श्रेणी शहरों के दर्शकों को उनके पसंद की फिल्म देना मकसद था। दर्शक चुनना निर्देशक का काम नहीं। दर्शक चुनने के बजाय फिल्म की कहानी पर ध्यान देना चाहिए था। असल में फिल्मकारों और दर्शकों के बीच एक तरह की दूरी आ गई है। कई सवाल हैं, जिनके जवाब फिल्म निर्माताओं को खुद तलाशने होंगे, तभी पता चलेगा कि आखिर कहां और क्या गलत हो रहा है।
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री महामारी के बाद के दौर में दर्शकों की भावनाएं समझने में नाकाम रही है। यह इंडस्ट्री को सीख लेने का वक्त है। अक्षय कुमार, आमिर खान, रणवीर सिंह, रनबीर कपूर जैसे बड़े सितारों की फिल्में एक के बाद एक बुरी तरह से नाकाम हो रही हैं।