कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में पूर्व सांसद भंवर जितेंद्र सिंह का दफ्तर है। वे पार्टी में उड़ीसा मामलों के प्रभारी हैं, लेकिन उनके दरवाजे पर राजस्थान विधानसभा चुनाव में टिकट मांगने वालों की भीड़ लगी है। जिला भरतपुर के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्र नंबर-071 के लिए टिकट मांग रहे गोपीचंद गुर्जर पूर्व विधायक नगर, कहते हैं कि जो भी हो, उनके नेता भंवर साहब हैं। वे उन्हीं को अपना आवेदन सौपेंगे। अगर आज कुछ नहीं हो पाया तो वे अपने समर्थकों के साथ दिल्ली के ही किसी होटल में ठहर जाएंगे। अलवर जिले की विधानसभा सीट थानागाजी के लिए टिकट मांगने वाले डॉ. सर्वेश सैनी का कहना है कि भले ही जितेंद्र सिंह उडीसा के प्रभारी हैं, मगर अलवर जिले की 11 विधानसभा सीटों पर तो उन्हीं की चलेगी। अशोक गहलौत साहब उनकी बात इंकार नहीं करेंगे।
टिकट लेने के लिए अध्यक्ष, चेयरमैन, और कई दर्जन गांवों के सरपंचों को संग लाए हैं
मध्यप्रदेश के मन्दसौर-जावरा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली जावरा विधानसभा सीट से टिकट मांगने के लिए मोहम्मद यूसुफ कड़प्पा भी कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे हैं। उनके साथ डेढ़ सौ समर्थक, जिनमें जनपद अध्यक्ष, चेयरमैन, जनपद प्रतिनिधि और कई दर्जन गांवों के सरपंच शामिल हैं, आए हैं। वे और उनके समर्थक तीन बसों में सवार होकर दिल्ली आए हैं।
उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी इस बार जावरा से पीके सिंह नाम के व्यक्ति को टिकट देना चाहती है। वे दो साल पहले आबकारी अधिकारी के पद से रिटायर हुए हैं। मोहम्मद यूसुफ के मुताबिक, उनके ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा पडा था; आरोप है कि उनके ठिकानों से आय से अधिक संपत्ति, पांच सौ करोड रुपये की राशि बरामद हुई थी। कई जगहों पर उनकी बेनामी संपत्तियां हैं।
मोहम्मद ने कहा, उन्होंने पिछले चुनाव में कांग्रेस पार्टी की टिकट पर यहां से चुनाव लडा था और 67 हजार वोट हासिल किए थे। उन्होंने अपने बॉयोडाटा में सभी दलों के संभावित उम्मीदवारों का जिक्र भी किया है। इस सवाल के जवाब में कि टिकट नहीं मिला तो क्या वे बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लडेंगे, उन्होंने कहा, अभी इस बारे में कुछ नहीं सोचा है। अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो यह राहुल गांधी के मापदंडों की हार होगी।उन्होंने साफ छवि के उम्मीदवारों के लिए जो मापदंड बनाए हैं, उसमें पीके सिंह किसी भी तरह से फिट नहीं बैठते।