कर्नाटक में 18वीं शताब्दी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाए जाने को लेकर उपजा विवाद तब और बढ़ गया जब बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनकी प्रशंसा की। कोविंद ने कहा कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए वे एक योद्धा की मौत मरे थे। भाजपा कई दिनों से टीपू जयंती मनाए जाने के फैसले का विरोध कर रही है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक विधानसभा के संयुक्त सत्र में कर्नाटक को दुर्जेय सैनिकों का राज्य बताया। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ते हुए एक योद्धा की मौत मरे थे। इसके साथ ही वे युद्ध में मैसूर रॉकेट को विकसित करने और उसका इस्तेमाल करने में अगुआ थे। इसी तकनीक को बाद में यूरोपीयों ने अपनाया।
राष्ट्रपति के संबोधन में इस लाइन के आते ही कांग्रेस नेताओं ने मेज पीटकर खुशी जाहिर की। वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कर्नाटक विधानसभा में भाषण देने के लिए राष्ट्रपति को बधाई दी। भगवा पार्टी 10 नवंबर को ‘टीपू जयंती’ मनाने के कांग्रेस सरकार के फैसले का विरोध कर रही है।
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भाजपा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने भाषण में टीपू के नाम को शामिल करके राष्ट्रपति कार्यालय का दुरुपयोग किया है। वहीं कांग्रेस ने कहा कि विपक्षी पार्टी को इस तरह के आरोप लगाते हुए शर्म आनी चाहिए। दरअसल भाजपा पूरा जोर लगाकर इसलिए इसका विरोध कर रही है क्योंकि वह टीपू सुल्तान को एक कट्टर धार्मिक और क्रूर हत्यारा मानती है।