गारंटीकृत पुरानी पेंशन बहाल हो
डॉ. मंजीत पटेल के मुताबिक, 'पेंशन जयघोष महारैली', एक निर्णायक रैली साबित होगी। एनपीएस कर्मियों की एक ही मांग है कि देश में गारंटीकृत पुरानी पेंशन बहाल हो। केंद्र सरकार, जिस एनपीएस स्कीम को आगे कर रही है, उसमें सुरक्षा का कोई भाव नहीं है। इसके अलावा यह योजना गारंटीकृत भी नहीं है। एनपीएस तो बाजार पर आधारित एक स्कीम है। बाजार की स्थिति से सभी अवगत हैं। इसमें डीए/डीआर के अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होती। 'पेंशन जयघोष महारैली' के जरिए सरकारी कर्मियों की एक ही मांग है कि पहले वाली गारंटीकृत पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए।
आंदोलन के चलते सरकार, दबाव में है
केंद्र सरकार को कर्मियों की यह मांग पूरी करनी पड़ेगी। सरकार ने इसके लिए एक कमेटी बनाई है। पेंशन व्यवस्था में कुछ बदलाव भी किए जा रहे हैं। हालांकि सरकारी कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। पदाधिकारियों के कहा, कर्मियों के आंदोलन के चलते सरकार, दबाव में है। संभव है कि 2024 में सभी सरकारी कर्मियों के लिए ओपीएस लागू हो जाएगी। देश में लगभग 85 लाख कर्मी, एनपीएस में शामिल हैं। इसमें से 30 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं, बाकी संख्या राज्य सरकारों के कर्मियों की है। बतौर डॉ. मंजीत पटेल, उन्हें उम्मीद है कि नववर्ष में गारंटीकृत पुरानी पेंशन की सौगात मिलेगी।
चुनाव में बड़े उलटफेर की बात
बता दें कि नई दिल्ली के रामलीला मैदान में दस अगस्त को केंद्र सरकार के कर्मियों की पहली रैली हुई थी। इसमें कई राज्यों के कर्मचारी संगठनों ने भी शिरकत की थी।
ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) की संचालन समिति के राष्ट्रीय संयोजक एवं स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद 'जेसीएम' के सचिव शिवगोपाल मिश्रा ने रैली में कहा था, लोकसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन लागू नहीं होती है तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है। इसके बाद एक अक्तूबर को रामलीला मैदान में ही 'पेंशन शंखनाद महारैली' आयोजित की गई। इसका आयोजन नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के बैनर तले हुआ था।
एनएमओपीएस के अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा था, पुरानी पेन्शन कर्मियों का अधिकार है। वे इसे लेकर ही रहेंगे। दोनों ही रैलियों में केंद्र एवं राज्य सरकारों के लाखों कर्मियों ने भाग लिया था। इन दो विशाल रैलियों के बाद 3 नवंबर को कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने रामलीला मैदान में रैली की थी।
ज्वाइंट फोरम की बैठक में हड़ताल पर निर्णय
'पुरानी पेंशन बहाली' की लड़ाई अब अंतिम दौर की तरफ बढ़ रही है। अगर सरकार, कर्मचारियों की इस मांग को नहीं मानती है तो उस स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल हो सकती है। कितने कर्मचारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल के पक्ष में हैं, यह पता लगाने के लिए केंद्र सरकार में दो बड़े विभाग, रेलवे और रक्षा विभाग (सिविल) में स्ट्राइक बैलेट यानी मतदान कराया गया था।
ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) की संचालन समिति के राष्ट्रीय संयोजक एवं स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद 'जेसीएम' के सचिव शिवगोपाल मिश्रा ने कहा, अब स्ट्राइक बैलेट का नतीजा आ गया है। रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 प्रतिशत कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है। अब ज्वाइंट फोरम की बैठक में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए निर्धारित तिथि की घोषणा पर चर्चा होगी।