सितंबर में कोरोना के दैनिक मामलों की संख्या में अचानक तेज उछाल देखा गया था जब 17 तारीख को एक दिन में सामने आने वाले मामलों की संख्या 97,894 हो गई थी। इसके बाद विश्व के कई अन्य देशों में संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के बावजूद भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आई थी।
भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के एक करोड़ मामले 19 दिसंबर को पूरे हुए थे। हालांकि, इस दौरान देश में कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ी थी और 10 लाख मामले सामने आने में करीब एक महीने का समय लगा था। यह स्थिति अगस्त से मध्य नवंबर के मुकाबले बहुत अलग थी, जब संक्रमण की रफ्तार बेहद तेज थी।
इसके साथ ही कोरोना से ठीक होने वाले मामलों की संख्या में भारत दुनिया में पहले स्थान पर आया। अब तक देश में 98 लाख से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हो चुके हैं। भारत ने पीपीई और एन-95 मास्क जैसी जरूरी चीजों का उत्पादन बढ़ाने के साथ जांच की सुविधाओं में इजाफा किया।
कोरोना वायरस महामारी से जंग के दौरान भारत ने कोविड-19 से बचाव के लिए पीपीई और एन-95 मास्क जैसी जरूरी चीजों का उत्पादन बढ़ाने के साथ ही जांच की सुविधा में भी बढ़ोतरी की और इनके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर विदेशों पर निर्भरता कम की।
महामारी की शुरुआत में शुरू में देश में सिर्फ पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) में जांच प्रयोगशाला के रूप में महज एक प्रयोगशाला थी। लॉकडाउन की शुरुआत में इसे बढ़ाकर 100 किया गया और 23 जून को आईसीएमआर ने देश में 1000वीं जांच प्रयोगशाला को मान्यता दी थी।
इलाज के लिए टीका विकसित करने के लिए जब कई देशों ने कमर कसी तो भारतीय वैज्ञानिकों ने भी पहल की और कम से कम तीन टीके विकसित करने की दिशा में दावेदारी। इनमें से एक को मंजूरी देने के लिए सक्रियता से विचार हो रहा है। अभी, छह टीके भारत में नैदानिक परीक्षण के दौर से गुजर रहे हैं।
महामारी का प्रसार रोकने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों के साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय लोगों में कोविड अनुकूल आचरण को अपनाने के महत्व को रेखांकित करने के लिये मीडिया से भी नियमित रूप से संपर्क में रहा। मास्क पहनने, हाथों की सफाई और शारीरिक दूरी के पालन का प्रभाव भी बताया गया।
सरकार पहले चरण में 30 करोड़ लोगों के टीकाकरण की तैयारी कर रही है ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में राज्यों को टीकाकरण अभियान के लिए ‘कोविड-19 टीका संचालन दिशा-निर्देश’ जारी किए हैं।
कोविड-19 टीका पहले स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों और 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को दिया जाएगा जिसके बाद अन्य बीमारियों से ग्रस्त 50 साल से कम उम्र के लोगों को यह दिया जाएगा। इसके बाद अंत में बची हुई आबादी को टीके की उपलब्धता के हिसाब से इसकी खुराक दी जाएगी।
कोविड-19 टीकों की आपूर्ति और वितरण की वास्तविक समय में निगरानी के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘कोविन’ नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाया है। लोग इसपर टीकों की उपलब्धता संबंधी विवरण देखने के साथ ही टीकों के लिए पंजीकरण भी करा सकेंगे।