लोकसभा चुनाव के पांचवें और राजस्थान के दूसरे चरण में 12 सीटों पर मतदान होगा। इन सभी सीटों पर वर्ष 2014 में भाजपा ने परचम लहराया था। इनमें से नागौर सीट पर भाजपा ने रालोपा से गठबंधन किया है और एक सीट उसके लिए छोड़ दी है।
कांग्रेस सभी 12 सीटों पर प्रत्याशी उतार चुकी है। कुल 134 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने राष्ट्रवाद के मुद्दों पर ही प्रचार अभियान चलाया, तो कांग्रेस ने ‘न्याय’, बेरोजगारी व किसान पर फोकस रखा। चंद सीट छोड़ दें, तो माहौल में राष्ट्रीय मुद्दे ही गूंज रहे हैं और जातीय व धर्म आधारित वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए पार्टियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। दो केंद्रीय मंत्रियों, ओलंपिक के दो पूर्व खिलाड़ियों, दो संतों सहित दो भाइयों व अलवर राजघराने की प्रतिष्ठा दांव पर है। भाजपा द्वारा छोड़ी गई नागौर सीट पर भी सभी की निगाहें रहेंगी।
इस बार दो ओलंपियंस के बीच चुनावी खेल, राठौड़ का निशाना और पूनिया का सियासी ‘थ्रो’
देश में सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक, इस सीट पर होगा। यहां केंद्रीय मंत्री और डबल ट्रैप शूटिंग में ओलंपिक पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सामने ओलंपिक में डिस्कस थ्रो में छठे स्थान पर रहीं कांग्रेस की प्रत्याशी कृष्णा पूनिया हैं। भाजपा प्रत्याशी राठौड़ इस सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ेंगे, तो पूनिया का यह पहला लोकसभा चुनाव है। पूनिया वर्तमान में विधायक हैं, लेकिन जयपुर ग्रामीण उनके लिए नया क्षेत्र है। स्थानीय जनता का भरोसा जीतना भी उनके लिए चुनौती है। राठौड़ को मोदी की टीम में सदस्य होने का फायदा मिलने की उम्मीद है, तो राज्य की सत्ता में वापसी के बाद कांग्रेस पार्टी पूनिया को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। राजपूत और जाट दोनों ही समाज यहां के बड़े वोट बैंक हैं।