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मोहब्बत की निशानी को दागदार होने से बचाएंगे पीपल और तुलसी

Thu, 14 Jul 2016 05:09 AM IST
राजीव शर्मा/अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, अागरा
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ताजमहल को प्रदूषण और कीड़ों से बचाने के लिए अब पीपल और तुलसी के पौधों का सहारा लिया जाएगा। बरगद और यूकेलिप्टस भी ताज को दागदार होने से बचाने में सहायक होंगे। वन विभाग स्मारक के आसपास इन पौधों को लगाने की तैयारी कर रहा है।
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गौरतलब है कि स्मारक के 500 मीटर दायरे में बिना अनुमति के लिए वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध है। प्रदूषण कम करने के लिए फाउंड्री उद्योग सहित पेठा और इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयों पर लगाम लगाई जा रही है।

हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद ताज पर प्रदूषण की मार से निजात नहीं मिल पा रही है। डीएफओ केके सिंह ने बताया कि ताजमहल के आसपास वन विभाग अपनी जमीन पर प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले पौधे रोपने की तैयारी कर रहा है। इसमें पीपल और बरगद के पौधे मुख्य होंगे। तुलसी के पौधे भी लगाने की योजना है।
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वनस्पति विज्ञान के विशेषज्ञों के मुताबिक पीपल और बरगद के पेड़ अपेक्षाकृत अधिक ऑक्सीजन देते हैं। यूकेलिप्टस मृदा प्रदूषण को कम करने के साथ ही ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने में सहायक होता है। तुलसी के पौधे की खुशबू से कीट-पतंगे दूर भागते हैं।
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बारिश और नमी से ताज को खतरा

सीलन और नमी के कारण चूना पत्थर की पकड़ ढीली पड़ रही है। इससे ताजमहल के पत्थर गिर रहे हैं। पखवाड़े भर में ही ताजमहल में तीन जगह से पत्थर उखड़ कर गिर गए। ताजमहल पर चार दर्जन से ज्यादा ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पानी दीवार में पहुंचकर चूना पत्थर की पकड़ को कमजोर कर रहा है।

एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. भुवन विक्रम ने बताया कि ताजमहल और अन्य स्मारकों के पत्थर नमी के कारण गिर रहे हैं। एएसआई रिसाव और नमी वाले हिस्सों का सर्वे करा रहा है, ताकि लीकेज और टूटे पत्थरों को बारिश के बाद बदला जा सके।

उल्लेखनीय है कि 1810 में चीफ इंजीनियर कर्नल हाइड ने भी ताज से संगमरमर के टूटने और कई कीमती पत्थर निकलने की रिपोर्ट दी थी। 1823, 1864, 1874, 1937-1940 और 2007 में मुख्य गुंबद पर बारिश से बचाव के लिए संरक्षण का काम किया गया।

1941 में एडवाइजरी कमेटी ने ताजमहल के मुख्य गुंबद पर बारिश के बाद लीकेज और पत्थरों के चटकने, टूटे होने की रिपोर्ट दी थी। ताज की चारों छतरियों में से दो को असुरक्षित पाया गया था। कमेटी ने ताज की दक्षिण-पश्चिमी मीनार साढ़े आठ इंच तक झुकी पाई थी।

उसके बाद से ही ताज में 104 बेंच मार्क बनाने, इमारत के जोड़ में व्हाइट सीमेंट भरने, मोर्टार-प्लास्टर लगाने और बारिश में मुख्य गुंबद की छत पर कं क्रीट का काम कराए जाने की सिफारेिश की थी।
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