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आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे महेंद्र सिंह धोनी, धोखाधड़ी का लगाया आरोप

Sun, 28 Apr 2019 08:40 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महेंद्र सिंह धोनी (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram
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महेंद्र सिंह धोनी ने 58,000 स्कवायर फीट में बने पेंटहाउस का कब्जा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह कदम उन्होंने तब उठाया है जब उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्ति फोरेंसिक ऑडिटर्स ने उन्हें उन लाभार्थियों में से एक माना है जिसे कि सवा करोड़ का पेंटहाउस केवल 20 लाख रुपये में मिला है। 

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आवंटन रद्द होने के डर से क्रिकेटर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और वह इस संपत्ति का कब्जा चाहते हैं। इस पेंटहाउस का निर्माण विवादों से घिरे आम्रपाली समूह ने बनाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार क्रिकेटर ने 2009 में नोएडा के सेक्टर 45 में स्थित फाइव बीएचके और फैमिली लाउंज वाले पेंटहाउस को केवल 20 लाख रुपये में उस समय खरीदा था जब उसका बाजार मूल्य सवा करोड़ रुपये था। 

जब ऑडिटर्स रवि भाटिया और पवन कुमार अग्रवाल ने पाया कि धोनी उन 655 खरीददारों में से एक है जिन्होंने आम्रपाली से औनेपौने दाम में फ्लैट खरीदा है तो उनसे समूह के साथ वित्तीय लेनदेन पर स्पष्टीकरण मांगा गया। क्रिकेटर ने ऑडिटर्स को बताया है कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य को आम्रपाली समूह से किसी तरह का फंड मिला है।
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धोनी ने दलील दी है कि फ्लैट की कीमत को इस तरह से देखा जाए कि आम्रपाली उन्हें करोड़ों रुपये का भुगतान करने में नाकाम रही है। उन्हें फ्लैट की कीमत में छूट इसलिए मिली क्योंकि वह समूह के ब्रांड एंबेसडर रहे हैं। ऑडिटर्स ने अदालत में दी रिपोर्ट में कहा है कि कुछ मामलों में फ्लैट एक रुपये प्रति स्कवायर फीट के हिसाब से बेचे गए थे। जबकि आम्रपाली समूह की विभिन्न आवास परियोजनाओं में करोड़ों की अघोषित धनराशि का निवेश किया गया था।

डेवलेपर ने फ्लैट को कागजों में औनेपौने दामों पर बिका हुआ दिखाया है लेकिन उसे खरीददारों से 159 करोड़ रुपये कालेधन के तौर पर मिले हैं। उच्चतम न्यायालय ने संकेत दिया है कि ऐसे दामों पर बिके फ्लैट को रद्द या नीलाम किया जा सकता है। इससे मिले पैसे को आम्रपाली की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने में लगाया जाएगा। इसी कारण अपने पेंटहाउस पर मालिकाना हक दिलाने के लिए क्रिकेटर अदालत पहुंचे हैं।

क्या है पूरा मामला

2009 में धोनी ने आम्रपाली ग्रुप से कई समझौते किए और कंपनी के ब्रैंड एंबेसडर बने। वह इस समूह के साथ छह साल तक जुड़े रहे, लेकिन साल 2016 में जब कंपनी पर खरीददारों को ठगने का आरोप लगा, तब उन्होंने आम्रपाली ग्रुप से खुद को अलग कर लिया। धोनी की पत्नी भी समूह के चैरिटी कार्यक्रम से जुड़ी थीं। आम्रपाली समूह पर शिकंजा कसते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 28 फरवरी को इसके सीएमडी अनिल शर्मा और दो डायरेक्टर्स शिव प्रिय और अजय कुमार को पुलिस हिरासत में भेज दिया था।

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