सीबीआई प्रकरण के बाद नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक के शीर्ष नौकरशाह सामान्य फोन कॉल करने से बच रहे हैं। उन सभी को यह डर है कि कहीं कोई जासूसी न हो रही हो, इस वजह से वे आपस में बातचीत करने के लिए व्हाट्सएप कॉल का उपयोग कर रहे हैं। खासतौर से आईपीएस अधिकारियों को अपने फोन टैप होने का ज्यादा डर सता रहा है। देश के शीर्ष नौकरशाह आखिर व्हाट्सएप पर कॉल करना और सुनना क्यों पसंद कर रहे हैं। इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए फ्लैशबैक में जाना पड़ेगा। अक्तूबर-2018 में शुरू हुए सीबीआई प्रकरण के बाद नॉर्थ ब्लॉक, विशेषकर गृह मंत्रालय और डीओपीटी के अफसर मोबाइल फोन पर बातचीत करने से बचने लगे हैं। साउथ ब्लॉक, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए), विदेश मंत्रालय, रॉ चीफ, तीनों सेनाओं के अध्यक्ष और सीबीआई निदेशक के कमरे हैं, वहां पर भी व्हाट्सएप कॉल का चलन शुरू हो गया है। दरअसल यह सब 'सीबीआई फोन टेपिंग' मामला उजागर होने के बाद देखने को मिला है। सीबीआई अफसरों का आपसी झगड़ा जब अदालत में पहुंचा तो फोन टैपिंग की एक भयानक तस्वीर सामने आई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल जो साउथ ब्लॉक में ही बैठते हैं, का फोन टेप होने का कथित मामला सामने आया तो दूसरे विभागों के अफसरों के होश उड़ गए। यह भी कहा गया कि सीबीआई की टेलीफोन टैपिंग इकाई (स्पेशल यूनिट) के जरिए कई और बड़े लोगों के फोन टेप हुए हैं। सीबीआई अधिकारी एमके सिन्हा की रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। मोईन कुरैशी मामले में तो रॉ के विशेष सचिव, सीबीआई के विशेष निदेशक और कई दूसरे लोगों के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड हो गई थी। इस मामले के फौरन बाद खासकर आईपीएस अफसरों ने तो सामान्य मोबाइल कॉल करना ही बंद कर दी। कोई अत्यंत करीबी या पूर्ण भरोसेमंद होता है तो ही ये अफसर मोबाइल कॉल रिसीव करते हैं अन्यथा व्हाट्सएप पर ही बात करने को प्राथमिकता देते हैं। कई अफसरों ने तो दो-दो फोन रखने शुरू कर दिए हैं। इनमें एक फोन बिना नेट वाला होता है। इससे केवल बातचीत हो सकती है। कुछ अफसर ऐसे भी बताए गए हैं, जो अब 'वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल' पर बातचीत कर रहे हैं। इसमें कॉल सेफ मानी जाती है। इसके तहत यदि आपके पास इंटरनेट (वाई-फाई) है, लेकिन मोबाइल में नेटवर्क नहीं है तो भी आप आसानी से सुरक्षित कॉलिंग कर सकते हैं। एस्सार ग्रुप पर सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल ने 2016 में एक जनहित याचिका में आरोप लगाया था है कि ग्रुप ने 2001 से 2006 तक एनडीए और यूपीए सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों का फोन टेप कराया था। उन्होंने मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी जैसे कारोबारी दिग्गजों का फोन भी टेप होने की बात कही थी। इतना ही नहीं, सुरेन उप्पल ने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान पीएमओ में कार्यरत एक अधिकारी का भी फोन टेप किया गया था। बता दें कि सुरेन उप्पल एस्सार ग्रुप के उस कर्मचारी के वकील रहे हैं, जिस पर कथित तौर पर फोन टैपिंग का आरोप लगा था। इतना ही नहीं, वकील की शिकायत के मुताबिक, तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु, पूर्व मंत्री प्रफुल्ल पटेल, राम नाईक, अनिल अंबानी की पत्नी टीना अंबानी और कई शीर्ष नौकरशाहों के फोन टेप किए गए थे। इसके साथ ही सपा नेता अमर सिंह, तत्कालीन सीनियर नौकरशाह और यहां तक कि गृह सचिव राजीव महर्षि का भी नाम सामने आया था। बतौर सुरेन, एनडीए सरकार में मंत्री रहे प्रमोद महाजन का फोन भी टेप किया गया था। टेलीकॉम लाइसेंसिंग के सिलसिले में भी कई लोगों के फोन सर्विलांस पर थे। हालांकि एस्सार ग्रुप ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया था। पिछले साल भी सीबीआई पर कथित रूप से एक केंद्रीय मंत्री का फोन टेप करने का आरोप लगा था। बाद में जांच एजेंसी ने इस आरोप को पूरी तरह से झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया था। बता दें कि व्हाट्सएप डिफॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल करता है। इससे फोन कॉल रिकॉर्ड नहीं हो सकती और न ही व्हाट्सएप द्वारा भेजे गए मैसेज को पढ़ा जा सकता है। एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन का मतलब है कि मैसेज, भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के बीच ही रहता है। अगर कोई कॉल रिकार्ड करने या डाटा चुराने का प्रयास करता है तो वह भी संभव नहीं होता। इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सप और भारत सरकार के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही है। सरकार ने व्हाट्सएप के सामने कुछ शर्तें रखी हैं। इनमें व्हाट्सएप कंपनी से कहा गया है कि वह व्हाट्सएप मैसेज के बारे में सरकार को जानकारी दे कि कौन-सा मैसेज कहां से वायरल हो रहा है। मैसेज भेजने वाले का मूल स्त्रोत यानी सबसे पहले किसने भेजा है, आदि जानकारी सरकार लेना चाहती है। फेसबुक के स्वामित्व वाला व्हाट्सएप इसके लिए राजी नहीं है। व्हाट्सएप प्रबंधन का कहना है कि हमारा सिस्टम डिफॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन तकनीक पर काम करता है। ऐसे में व्हाट्सएप के किसी मैसेज को पढ़ा नहीं जा सकता है, क्योंकि एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के जरिए वह मैसेज, भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के बीच ही रहता है। व्हाट्सएप के कम्युनिकेशन प्रमुख कार्ल वूग का कहना था कि सरकार मैसेजेज भेजने वाले की जानकारी चाहती है। अगर हम यह जानकारी सरकार को दे देंगे तो व्हाट्सएप किसी काम का नहीं रहेगा। इसकी निजता खत्म हो जाएगी। भारत में व्हाट्सऐप के 20 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं।