सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बेचे जाने के आरोप गलत हैं ओर वे ऐसे ही रहेंगे। बजट में घोषित नीति में इसका स्पष्ट उल्लेख है। उन्होंने विपक्ष के कुछ सदस्यों के आरोपों को नकारते हुए कहा कि कोई हमारे पैसे को बाहर लेकर नहीं जाएगा, पैसा हमारे यहां ही रहेगा। और तो और मुनाफे का एक हिस्सा भी यहीं रहेगा।
विधेयक का एलआईसी से लेना-देना नहीं
वित्त मंत्री ने कहा कि इस विधेयक का एलआईसी से कोई लेनादेना नहीं है। यह विधेयक बीमा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। जब बीमा क्षेत्र की बात की जाती है तो यह ध्यान देना चाहिए कि इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की सात कंपनियां और निजी क्षेत्र की 61 कंपनियां हैं। मंत्री ने कहा कि जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं तब बीमा कवर बढ़ना चाहिए । देश के दलितों, शोषितों, वंचित वर्गों सभी को सुविधा मिलनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने इसी सोच के तहत जीवन ज्योति बीमा योजना पेश की थी।
उन्होंने संप्रग के समय भाजपा द्वारा इस विधेयक का विरोध किये जाने की विपक्षी सदस्यों की टिप्पणी पर कहा कि तब हमारे नेताओं ने इसके विरोध में कदम लिया था जो तब की स्थिति के अनुसार था क्योंकि तब सुरक्षा मानक नहीं थे, लेकिन आज हम पर्याप्त सुरक्षा मानक लाए हैं।
कांग्रेस के एक सदस्य की टिप्पणी का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि बैंकों का राष्ट्रीयकरण तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था, लेकिन भ्रष्टाचार के राष्ट्रीयकरण का काम संप्रग के समय हुआ। उसे सुधारने का काम नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्यों ने नीरव मोदी आदि का नाम लिया, लेकिन उनका पालन-पोषण करने वाली कांग्रेस ही थी।
2015 में बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी की गई एफडीआई सीमा
सीतारमण ने कहा कि आप कांग्रेस को चलाने वाले अपने परिवार से पूछिए कि उन्होंने यह काम क्यों किया। 2015 में जब बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ा कर 49 फीसदी की गई थी उसके बाद से 26,000 करोड़ का निवेश आया। ज्यादा से ज्यादा निवेश आने से न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी बल्कि लोगों को बेहतर पैकेज, बेहतर प्रीमियम की सुविधा मिल सकेगी तथा रोजगार भी बढ़ेंगे। इस विधेयक को गहन विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है और देश के हितों से कोई समझौता करने का सवाल ही नहीं उठता।