विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए के तहत पंजीकृत सक्रिय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की संख्या बीते एक दशक में करीब आधी रह गई है। हालांकि, इसी अवधि में विदेशों से मिलने वाले अंशदान में बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी एफसीआरए संशोधन विधेयक पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की पहली बैठक में गृह मंत्रालय की ओर से दी गई।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में देश के 15 राज्यों में एफसीआरए के तहत 14,466 सक्रिय एनजीओ पंजीकृत थे। वर्ष 2015 में यह संख्या 29,022 थी। यानी 10 वर्षों में सक्रिय पंजीकृत एनजीओ की संख्या 14,556 कम हुई है।
विदेशी अंशदान में हुई बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक, एफसीआरए के तहत पंजीकृत एनजीओ को 2015-16 में 17,832 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान मिला था। वर्ष 2024-25 में यह राशि बढ़कर 22,974 करोड़ रुपये हो गई। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के नेतृत्व में गृह मंत्रालय के अधिकारियों के दल ने भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली जेपीसी को यह जानकारी दी।
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा सक्रिय एनजीओ
15 राज्यों में एफसीआरए के तहत पंजीकृत सक्रिय एनजीओ की संख्या के मामले में तमिलनाडु सबसे आगे है। यहां 2,102 संगठन पंजीकृत हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 1,578, कर्नाटक में 1,355, दिल्ली में 1,218, आंध्र प्रदेश में 1,022 और केरल में 1,013 एनजीओ हैं। विदेशी धन प्राप्त करने वाले सभी संगठनों के लिए एफसीआरए के तहत पंजीकरण जरूरी है। गृह मंत्रालय इस कानून के लिए नोडल प्राधिकरण है।
अमेरिका सबसे बड़ा दानदाता
वर्ष 2024-25 में विदेशी अंशदान देने वाले देशों में अमेरिका सबसे आगे रहा। वहां से 12,113 करोड़ रुपये का योगदान मिला। इसके बाद ब्रिटेन से 2,414 करोड़ रुपये, जर्मनी से 1,782 करोड़ रुपये, स्विट्जरलैंड से 733 करोड़ रुपये और सिंगापुर से 669 करोड़ रुपये मिले।
धार्मिक संगठनों को मिले 5,150 करोड़ रुपये
जेपीसी को बताया गया कि 2024-25 में मिले कुल विदेशी अंशदान में से 5,150 करोड़ रुपये धार्मिक संगठनों को प्राप्त हुए। इनमें ईसाई संगठनों को 1,345 करोड़ रुपये, हिंदू एनजीओ को 328 करोड़ रुपये, गैर-धार्मिक श्रेणी के संगठनों को 60 करोड़ रुपये, बौद्ध एनजीओ को 51 करोड़ रुपये और मुस्लिम संगठनों को 19 करोड़ रुपये मिले।
इसी अवधि में विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली सबसे आगे रहा। दिल्ली में 5,834 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान मिला। कर्नाटक को 3,164 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 2,385 करोड़ रुपये और तमिलनाडु को 2,313 करोड़ रुपये मिले। केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में विदेशी अंशदान का बड़ा हिस्सा ईसाई संगठनों को मिला। वहीं, गुजरात, दिल्ली और तमिलनाडु में हिंदू एनजीओ को अधिक राशि मिली।
35,968 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान इस्तेमाल नहीं हुआ
गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024-25 में कुल 35,968 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान अप्रयुक्त था। इसमें 21,140 करोड़ रुपये सावधि जमा यानी एफडी में रखे थे। एनजीओ के उपयोग खातों में 8,394 करोड़ रुपये और निर्दिष्ट खातों में 6,377 करोड़ रुपये थे।
500 करोड़ से अधिक पाने वाला एक एनजीओ
वर्ष 2022 से 2024 के बीच एक एनजीओ को 500 करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी अंशदान मिला। इसी अवधि में 14 एनजीओ को 100 करोड़ से 500 करोड़ रुपये के बीच और 294 एनजीओ को 10 करोड़ से 50 करोड़ रुपये के बीच विदेशी अंशदान प्राप्त हुआ। वहीं, 4,508 एनजीओ को पांच लाख रुपये से 50 लाख रुपये के बीच विदेशी अंशदान मिला।
अब तक 21,983 एनजीओ का पंजीकरण रद्द
सरकार ने अब तक 21,983 एनजीओ का एफसीआरए पंजीकरण रद्द किया है। इनमें 91.3 प्रतिशत मामलों में कार्रवाई वार्षिक रिटर्न दाखिल नहीं करने के कारण हुई। 7.9 प्रतिशत मामलों में एनजीओ के निष्क्रिय रहने और 0.4 प्रतिशत मामलों में कानूनी उल्लंघन के चलते पंजीकरण रद्द किया गया।