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राष्ट्रगान व ध्वजारोहण पर कथित फतवे से विवाद

Sun, 09 Oct 2016 04:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सितारगंज/बरेली
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स्वतंत्रता दिवस पर ऊधमसिंह नगर के एक गांव में उर्स के मौके पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने के खिलाफ बरेली के दो मुफ्तियों के कथित फतवे से विवाद की स्थिति बन गई है। इस फतवे का हवाला देकर गांव वालों ने आयोजनकर्ता का हुक्का पानी बंद कर दिया तो नाराज लोगों ने शनिवार को पुलिस को तहरीर देकर फतवा जारी करने वालों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। 
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इधर कथित रूप से फतवा देने वालों में शामिल बताए जा रहे एक मुफ्ती ने एसे किसी फतवे से इनकार किया है। दूसरे मुफ्ती से संपर्क नहीं हो पाया। बरेली आला हजरत दरगाह से जुड़े दूसरे मुफ्ती भी कह रहे हैं कि किसी भी मौके पर तिरंगा फहराना और राष्ट्रगान गाना किसी भी तरह से शरियत के खिलाफ नहीं है।

नया गांव स्थित सय्यद शाह अहमद हसन उर्फ पहलवान मियां की दरगाह पर 15 अगस्त को ही कुल शरीफ था। स्वतंत्रता दिवस भी साथ में होने के कारण धर्मगुरु सय्यद शाह मोहम्मद ताहिर मियां ने कुल शरीफ में तकरीर के बाद मुल्क में अमन चैन की दुआ मांगने के साथ ध्वजारोहण व राष्ट्रगान कराया गया था। बताया जा रहा है कि इस आयोजन पर तीन लोगों ने बरेली के मुफ्ती अफरोज आलम और मुफ्ती अफजाल रजवी से राय मांगी तो उन्होंने इसे गैरशरई बता कर फतवा जारी कर दिया।  
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 धर्म गुरु को भी मानसिक आघात पहुंचा है

इस फतवे के खिलाफ शनिवार को नया गांव के लोगों ने सितारगंज कोतवाली में तहरीर दी। जिसमें बताया गया है कि फतवा जारी कराने वाले सांप्रदायिकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। जिससे आसपास के क्षेत्र में तनाव तो है ही  धर्म गुरु को भी मानसिक आघात पहुंचा है और वह व उनका परिवार आरोपियों की धमकियों से भयभीत हैं। उन्होंने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत करने वालों में वजुल कमर, जफरुद्दीन, एजाज, अली अहमद, इकरार, बबलू, हाजी इनायतउल्ला, हाजी अफसर खां आदि शामिल थे।

दारुल इफ्ता मंजरे इस्लाम, दरगाह आला हजरत बरेली के मुफ्ती मोहम्मद  सलीम नूरी ने कहा कि कुल के दौरान स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पड़ने की वजह झंडा फहराया गया है तो ये शरियत के खिलाफ नहीं हैं। शरियत इसे जुर्म नहीं मानती और ऐसे लोगों पर कोई आरोप भी नहीं बनता है। 

हम लोगों ने सितारगंज में कुल के दौरान झंडा फैराने के संबंध में कोई फतवा नहीं दिया है। हमारे यहां तो राष्ट्रीय पर्वों पर खुद झंडा फहराया जाता है और तकरीरें भी होती। जहां तक मुफ्ती अफजाल रजवी की बात हैं वह कहीं और के हो सकते हैं यहां के नहीं हैं। - मुफ्ती अफरोज आलम, दारुल इफ्ता मंजरे इस्लाम, दरगाह आला हजरत बरेली।
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