देश में डिब्बा बंद सामग्री के कारण लोगों में डायबिटीज और मोटापा की समस्याएं बढ़ी हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की निदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि देश में गैर संक्रामक रोग केमरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।
इसमें बड़ा कारण डिब्बा बंद और पैकेट वाले फूड हैं। बीमारियों से बचने के लिए जरूरी है कि डिब्बे या पैकेट पर ही साफ-साफ लिखा जाना चाहिए कि खाद्य सामग्री में क्या-क्या मिलाया गया है।
सुनीता नारायण ने कहा कि, सात साल पहले 2013 में भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएएसएसएआई) की ओर से गठित कमेटी ने पहली बार जंकफूड पर नियंत्रण केलिए कई कदम सुझाए गए थे। जिसमें साधारण और प्रभावी लेबलिंग केजरिए उपभोक्ताओं को खाद्य सामग्री के भीतर इस्तेमाल वस्तुओं की पूरी जानकारी देने का निर्देश था।
उस समय से अब तक कई कमेटियां बनीं, कई प्रस्ताव आए लेकिन धरातल पर कु छ भी नहीं हुआ। भारत लगातार इन वस्तुओं की वजह से लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियों का गढ़ बन गया। वे पैकेज्ड फूड पर फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग पर आयोजित ग्लोबल वेबिनार को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि सीएसई केरिसर्च में यह बात सामने आई कि गैर संचारी रोग से मरने वालों की संख्या देश में 1990 में 38 फीसदी से बढ़कर 2016 में 62 फीसदी हो गई है। ये आंकड़े भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 2017 मेें जारी किए थे।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) केअनुसार भारत की कुल वयस्क पुरुष आबादी की 17 फीसदी डायबिटीज से पीड़ित है, वहीं 14 फीसदी महिला आबादी को मधुमेह है। यही आंकड़ा सर्वे 4 में 8 और 6 फीसदी था।
वहीं एनएफएचएस के अनुसार 22 राज्यों में से 16 में महिलाओं में मोटापा बढ़ा है। वहीं, पुरुषों और बच्चों में भी यह संख्या बढ़ी है। नारायण ने सरकार से इस दिशा में वार्र्निंग लेबल पर गंभीरता से कदम उठाने की मांग की।