विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि अमेरिका कोरोना वैक्सीन उत्पादन से जुड़े कच्चे माल पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता है। इसके लिए अगले सप्ताह बैठक आयोजित की जाएगी।
उधर, विश्व बैंक की तरफ से आयोजित चर्चा सत्र में यह मुद्दा उठाने वाले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा है कि अगले कुछ सप्ताह उत्पादन प्रभावित नहीं होगा, लेकिन इसके बाद परेशानी खड़ी हो सकती है।
डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि कोरोना वैक्सीन को लेकर दुनिया के सभी बड़े देशों के बीच करार हुआ है, जिसमें स्पष्ट है कि वैक्सीन या फिर कोविड महामारी से जुड़े किसी भी काम में अड़चन पैदा नहीं की जा सकती है।
इसलिए कच्चे माल आदि के आयात-निर्यात पर कोई भी देश प्रतिबंध नहीं लगा सकता। अमेरिका के फैसले को लेकर सोमवार और मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल की बैठक होने जा रही है। उम्मीद है कि उस बैठक में कोई समाधान जरूर निकालेगा।
इससे इतर दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ पूनावाला ने कहा, कोविड-19 महामारी के इस वक्त में जहां हर देश एक दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ रहा है।
ऐसे में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया भी दुनिया के कई देशों की जरूरत को पूरा करने के लिए रात दिन वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है, लेकिन अमेरिका का फैसला काफी नुकसान दे सकता है।
वर्तमान में वैक्सीन का पर्याप्त भंडारण और उत्पादन के पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध है, लेकिन इससे अगले कुछ सप्ताह तक ही काम चलाया जा सकता है। अगर जल्द ही अमेरिका ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो शायद कुछ सप्ताह बाद वैक्सीन उत्पादन को कम करना या पूरी तरह रोकना पड़ सकता है।
पूनावाला ने कहा कि नोवावैक्स वैक्सीन का प्रमुख निर्माता होने की वजह से उनको इन वस्तुओं की जरूरत है। अगर हम पूरी दुनिया के लिए वैक्सीन निर्माण की बात करें तो हमें इन महत्वपूर्ण कच्चे माल को लेकर दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।
क्यों उठी है चिंता
अमेरिका में जो बाइडन प्रशासन ने अपने देश में टीकाकरण कार्यक्रम को गति देने के लिए डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट लागू करने का ऐलान किया है। इसके बाद वैक्सीन उत्पादन से जुड़े कच्चे माल का निर्यात प्रतिबंधित हो सकता है। इसको लेकर ही वैक्सीन उत्पादन कंपनियां सवाल खड़े कर रही हैं। अदार पूनावाला ने कहा कि इसके लिए बाइडन प्रशासन ने चर्चा करने की जरूरत है।