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'खेती का खून' : जावड़ेकर का राहुल पर पलटवार, पूछा- 84 में सिखों का जनसंहार नहीं हुआ था क्या?

Tue, 19 Jan 2021 05:29 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर - फोटो : amar ujala
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किसान आंदोलन को लेकर अब सियासी वार-पलटवार तेज हो गए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को 'खेती का खून' शीर्षक से बुकलेट जारी कर केंद्र सरकार को घेरा। इस पर केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पलटवार करते हुए कहा-‘आप खेती के खून‘ की बात कर रहे हो, लेकिन 1984 के सिख नरसंहार का क्या?

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जावड़ेकर ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से यह भी पूछा कि-1984 में  दिल्ली में 3000 सिख जिंदा जलाए गए थे, क्या वह जनसंहार नहीं था? कांग्रेस राज में लाखों किसानों ने खुदकुशी की, क्या तब उनके शरीर में खून नहीं था? 
 

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कांग्रेस ने जारी की 'खेती का खून' बुकलेट
इससे पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि कानूनों पर 'खेती का खून तीन काले कानून' नाम से बुकलेट जारी की। खेती में एकाधिकार का सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आज तक कृषि क्षेत्र का फायदा किसानों और मजदूरों को मिलता था। एक ढांचा था जिसमें मंडिया, आवश्यक वस्तु अधिनियम व अन्य कानून शामिल थे। नए कृषि कानून से तीन-चार लोगों के हाथों में देश की पूरी खेती का ढांचा चला जाएगा। देश को सिर्फ कुछ लोग चला रहे हैं। चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

तीन-चार लोगों का हो रहा एकाधिकार स्थापित
कांग्रेस नेता ने दावा किया, 'हवाई अड्डों, बुनियादी ढांचे, दूरसंचार, रिटेल और दूसरे क्षेत्र में हम देख रहे हैं कि बड़े पैमाने पर एकाधिकार स्थापित हो गया है। तीन-चार पूंजीपतियों का एकाधिकार है। ये तीन-चार लोग ही प्रधानमंत्री के करीबी हैं और उनकी मदद करते हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि क्षेत्र अब तक एकाधिकार से अछूता था, लेकिन अब इसे भी निशाना बनाया जा रहा है। ये तीनों कानूनों इसीलिए लाए गए हैं।

राहुल गांधी ने कहा, 'आज देश के सामने एक त्रासदी आ गई है, सरकार देश की समस्या नजरअंदाज करना चाहती है और गलत सूचना दे रही है। मैं अकेले किसानों के बारे में बोलने वाला नहीं हूं। किसानों का संकट इस त्रासदी का एक हिस्सा मात्र है। यह युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यह वर्तमान के बारे में नहीं बल्कि आपके भविष्य के बारे में है।' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की कोशिशों के बावजूद किसान थकने वाले नहीं हैं क्योंकि 'वे प्रधानमंत्री से ज्यादा समझदार हैं।'
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