पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच किसानों ने एक बार फिर आंदोलन करने का फैसला किया है। किसान 29 और 30 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ा प्रदर्शन करेंगे। 29 नवंबर रात को रामलीला मैदान में 'एक शाम, किसानों के नाम' नाम से एक कार्यक्रम भी रखा गया है। किसान अपने उपज मूल्य की कीमतें स्वामीनाथन आयोग द्वारा तय सी2 तकनीकी के आधार पर तय कराना चाहते हैं। इसके अलावा कर्जमाफी उनकी दूसरी महत्त्वपूर्ण मांग है।
किसान नेता वीएम सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस में इस आंदोलन के बारे में जानकारी दी और कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले किसानों को उपज लागत से डेढ़ गुना कीमत देने का वायदा किया था, लेकिन सरकार का कार्यकाल पूरा होने का समय आ जाने के बाद भी मांग पूरी नहीं की गई। सरकार की इस वादाखिलाफी को जनता के सामने उजागर करने के लिए मुख्य चुनावों के बीच आंदोलन का एलान किया गया है।
योगेंद्र यादव ने दावा किया कि सरकार ने पिछले दिनों किसानों को उनके उपज मूल्य का डेढ़ गुना एमएसपी देने का ढिंढोरा पीटा था। लेकिन इसकी पोल खुद सरकार के द्वारा दी जा रही जानकारी से ही खुल रही है। वास्तविकता यह है कि किसानों को मौजूदा फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से बहुत कम कीमत पर खरीदा जा रहा है। यह सीधे-सीधे एक अपराध है। उन्होंने कहा कि किसान इस तरह हजारों करोड़ रुपये का नुकसान झेल चुके हैं।