26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के बावजूद कृषि कानूनों को निरस्त कराने के लिए चल रहा किसान आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा। कुछ किसान संगठनों के आंदोलन से पीछे हटने को किसान नेताओं ने आंदोलन को भटकाने की कोशिश बताया है। आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए किसान नेता गुरुवार और शुक्रवार शाम बैठक कर महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे।
लोक संघर्ष मोर्चा की नेता प्रतिभा शिंदे ने अमर उजाला को बताया कि 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए भारी संख्या में पूरे देश से किसान आए थे। परेड के बाद उनका घर वापस जाने का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था। ऐसे में कुछ लोगों के वापस जाने को आंदोलन से किसानों के पीछे हटने के रूप में प्रचारित करना सरासर गलत है।
किसान नेता का कहना है कि वर्तमान आंदोलन 40 प्रमुख किसान संगठन 'संयुक्त किसान मोर्चा' के एक बैनर तले चला रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट) पहले से ही इस किसान आंदोलन का हिस्सा नहीं था। ऐसे में उसके इस आंदोलन से पीछे हटने या न हटने को किसी तरह से महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। भानू गुट के नेता लगभग एक महीने पहले भी इस आंदोलन से हटने की बात कह चुके हैं।
एक अन्य किसान नेता सरदार वीएम सिंह ने भी आंदोलन से पीछे हटने की घोषणा की है। जबकि आरोप है कि आंदोलन से इतर अपना एजेंडा चलाने के आरोप में उन्हें किसान संगठनों के एक शीर्ष संगठन ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के सर्वोच्च पद से पहले ही हटाया जा चुका है। किसान नेताओं का कहना है कि ऐसे में उनके आंदोलन से पीछे हटने से वर्तमान आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के सचिव अविक साहा ने अमर उजाला से कहा कि किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा होने से आंदोलन की साख को चोट पहुंची है। लेकिन आंदोलन में हिंसा होने की बात दिल्ली पुलिस को पता नहीं चली, यह सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील है। वह भी ऐसे समय पर जब राजधानी में 26 जनवरी पर गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया जा रहा था। ऐसे में यह पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
किसान नेता साहा ने कहा कि किसान संगठन इस मामले पर बैठक कर आंदोलन के आगे की रणनीति तय करेंगे। कृषि कानूनों को खत्म कराने के लिए आंदोलन की शुरुआत हुई थी और उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेताओं ने कहा है कि परेड में हुई हिंसा से आंदोलन की साख को चोट पहुंची है। इसके कारण आंदोलन की पवित्रता प्रभावित हुई है। किसान नेता स्वयं अपने बीच रह रहे अराजक लोगों को पकड़कर पुलिस को सौंपेंगे। इस बीच पुलिस को अराजक लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।