गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान संगठन ने बातचीत के नए प्रस्ताव को सरकार का दुष्प्रचार बताया है। कृषि मंत्रालय के पत्र संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा, सरकार बार-बार बातचीत का प्रस्ताव देकर यह माहौल बनाना चाहती है कि किसान संगठन बात नहीं करना चाहते। सरकार बात करना चाहती है तो तीनों कानूनों को रद्द करने की बात प्रस्ताव में शामिल करे।
सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बार्डर पर आंदोलन कर रहे 40 किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा की शुक्रवार को बैठक होगी, जिसमें सरकार के नए पत्र पर मंथन होगा। इसके बाद किसानों की ओर से आधिकारिक जवाब दिया जाएगा।
बृहस्पतिवार देर शाम संयुक्त मोर्चा ने कहा, सरकार हमारी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है, इसलिए रोज-रोज पत्र लिख रही है। सरकार का नया पत्र भी आंदोलन के खिलाफ दुष्प्रचार से इतर कुछ नहीं है। किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा, अगर सरकार बात करने के लिए गंभीर है तो तीनों कानूनों को वापस लेने की बात करे।
इसके साथ ही एमएसपी की कानूनी गारंटी भी हमारी प्रमुख मांग है। सरकार इसे अनदेखा नहीं कर सकती। अब हम शुक्रवार की बैठक में नए पत्र पर विचार करेंगे। गौरतलब है किसान संगठनों और सरकार के बीच पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही है।