तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग पर अड़े किसानों ने शुक्रवार को कहा, अगर 4 जनवरी को की बैठक में उनके हक में फैसला नहीं हुआ तो कड़े कदम उठाएंगे।
किसान संगठनों ने कहा, कानूनों की वापसी और एमएसपी पर कानूनी गारंटी से कम कुछ मंजूर नहीं। वहीं, केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सकारात्मक बातचीत की उम्मीद जताई। हालांकि उन्होंने कहा, वह ज्योतिषी नहीं जो अभी यह बता दें कि बैठक में क्या होगा।
हाड़ कंपाती सर्दी में सड़क पर नया साल मनाने वाले किसान संगठनों ने सिंघु बॉर्डर पर कहा, सरकार से बातचीत में अब तक पांच फीसदी मुद्दों पर ही चर्चा हुई है। किसान नेता विकास ने कहा, अगर 4 जनवरी की बैठक में सरकार गतिरोध खत्म करने में नाकाम रही तो हरियाणा के मॉल और पेट्रोल पंप बंद कराए जाएंगे।
किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा, समाधान नहीं निकला तो छह जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। वहीं, तोमर ने कहा, पिछली बैठक में आधे मसले हल हो गए और उम्मीद है कि सातवें दौर की बैठक में सकारात्मक परिणाम आएंगे। मुझे उम्मीद है कि जो भी फैसला होगा वह किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के हित में होगा।
866 शिक्षाविदें का कानूनों के समर्थन में पत्र
देश के 866 शिक्षाविदें ने कृषि कानूनों के समर्थन में खुला पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि तीनों कानून किसानों की आमदनी बढ़ाने वाले हैं और इनसे किसानों का हित होगा। उपज सुरक्षित रहेगी और कोई किसानों का हक छीन नहीं सकेगा। इन शिक्षाविदें में दिल्ली विश्वविद्यालय, बीएचयू और जेएनयू समेत अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसर शामिल हैं।