चंडीगढ़ में किसान बरनाला में लागू धारा 144 तोड़कर ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर डीसी कांपलेक्स पहुंचे। किसान डीसी कांप्लेक्स में घुसने लगे तो उनकी पुलिस मुलाजिमों से धक्कामुक्की हो गई। पुलिस ने उन पर हल्का बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ दिया।
अबोहर में आधी रात को ही सब्जियों से लदे वाहन मंडी पहुंच गए। हड़ताल के पहले दिन मंडी में खूब सब्जियां बिकीं, किसान चौराहों पर खड़े रहे।
लुधियाना में रोजाना की अपेक्षा चालीस फीसदी सब्जी मंडी में पहुंचने से दाम बढ़े। हड़ताल से सब्जियों की कीमतों में उछाल आ गया। दूसरी तरफ फतेहगढ़ साहिब में नवजोत सिंह सिद्धू दूध/सब्जी खरीदने पहुंचे।
सिद्धू ने किसानों से शिमला मिर्च, भिंडी, करेले, लहसुन खरीदे। हालांकि मुक्तसर में किसान आंदोलन फीका रहा। न तो दूध की सप्लाई प्रभावित हुई न सब्जियों की, मगर दामों में कुछ उछाल आ गया। किसानों ने दोधियों को रोक वापस भेज दिया।
हड़ताल का हरियाणा के गुरुग्राम में भी कोई असर देखने को नहीं मिला। आम दिनों की तरह वह दूध, फल व सब्जियां बेचने के यहां पहुंचे। हालांकि देशभर के किसानों की हड़ताल को प्रदेश के किसानों ने भी समर्थन दिया है। इस पर प्रदेश सरकार भी नजर बनाए हुए है।
हालांकि किसान संगठनों ने यह भी फैसला लिया है कि यदि किसी भी व्यक्ति को हड़ताल के दौरान दूध, फल, सब्जियां आदि कोई चीज चाहिए तो वह किसानों के रेट के अनुसार इसे खरीद सकता है। इस छूट में इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि कोई भी व्यक्ति इसका व्यापारीकरण न कर सके।
किसानों के निर्णय को देखते हुए प्रदेश में कुछ स्थानों पर दूध, फल-सब्जी की किल्लत होने से दाम बढ़ सकते हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह का कहना है कि देश के करीब 172 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हुए हैं।
किसान आंदोलन के तहत किसान अपने उत्पादन अनाज, सब्जी, दूध, चारा शहर में बेचने के लिए नहीं जाएंगे। किसान अपनी सब्जी, दूध, चारे को गांव में बेच सकते हैं और शहर के लोग गांव में जाकर जरूरत के लिए सामान खरीद सकते हैं लेकिन किसान अपने उत्पादन के दाम अपने हिसाब से तय करेगा।
राजस्थान में भी किसानों ने मंडियों में सब्जियों की व घरों में दूध की आपूर्ति रोक दी और सड़क किनारे कई जगह दूध भी बहा दिया। यहां के किसान भी कर्जमाफी और फसलों का सही दाम दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन पर चले गए हैं। जयपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित लगभग हर जिले में किसानों ने दूध और सब्जी को सड़क पर फेंक कर प्रदर्शन किया।