दूसरे दौर की वार्ता में पराली और बिजली के मुद्दे पर चर्चा हुई। सरकार ने पराली कानून को सिरे से खत्म करने पर तत्काल हामी भर दी। बिजली में सिंचाई के लिए सब्सिडी जारी रखने का भरोसा दिया गया। बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों समेत अन्य फैसले राज्य सरकार पर छोड़ दिया। इस आश्वासन पर किसान तैयार हो गए। अब 4 जनवरी को कृषि कानूनों के रद किए बगैर विकल्प और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी बनाम लिखित गारंटी के विकल्प पर वार्ता होगी। इस वार्ता से पहले 2 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा अपनी रणनीति और वैकल्पिक उपायों पर मंथन करेगा। सरकार भी तब तक कुछ बीच का रास्ता निकालने पर विचार करेगी।
चाय से लंगर तक बदले माहौल में चर्चा
डेडलॉक से डॉयलॉग के बीच इस बार काफी बदला-बदला माहौल रहा। सत श्री अकाल से शुरुआत हुई। किसानों ने सरकार की चाय पी। चाय पर चर्चा हुई। फिर किसानों के लंगर में तीनों मंत्री नरेंद्र तोमर, पीयूष गोयल, सोमप्रकाश पहुंचे। साथ लंगर छका। लंगर के बाद चर्चा जारी रही। इस बार यस-नो के बजाए दो कदम आप, दो कदम हम जैसा माहौल रहा। सरकार नरम पड़ी। किसान संगठनों ने भी 4 जनवरी की प्रस्तावित अगली वार्ता तक आंदोलन में नरमी बरत कर समाधान की ओर एक और कदम बढ़ाया है, सो उम्मीद जागी है कि नया साल मंगलमय हो सकता है।