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सरकार मांगेगी किसानों से विकल्प और पूरी कर लेगी वार्ता की एक और औपचारिकता

Tue, 19 Jan 2021 01:52 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • वार्ता के फिर से बेनतीजा रहने के आसार, बातचीत को लेकर कोई होमवर्क नहीं
  • किसान संगठन भी सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति में जुटे
  • सरकार दे सकती है 26 जनवरी के बाद वार्ता की अगली तारीख और किसान कर सकते हैं इनकार
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किसान नेताओं और सरकार की बैठक शुरू - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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किसान संगठन पिछले तीन दिन से सरकार के रवैये को देखते हुए आक्रामक रणनीति बनाने में जुटे हैं। किसान संगठनों में भी थोड़ी बहुत खींचतान शुरू हो गई है। कुछ संगठन सरकार के साथ थोड़ा ढीला रुख लेकर चलना चाह रहे हैं, जबकि पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा के किसान संगठन किसानों के हित में अपने उद्देश्य को लेकर अड़े हुए हैं। दूसरी तरफ सरकार किसान संगठनों में बन रही मतभेद की स्थिति का फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रही है। मंत्रालय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 20 जनवरी की वार्ता के लिए केन्द्र सरकार कोई खास होमवर्क करके वार्ता की मेज पर नहीं आने जा रही है।

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बताते हैं सरकार तीनों कृषि कानूनों के एक-एक बिन्दुओं पर किसान संगठनों से बुधवार 20 जनवरी को भी चर्चा करेगी और किसानों से ही विकल्प मांगेगी। किसान संगठनों ने सरकार से तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर खरीद की गारंटी मांगने का मन बनाया है। कुल मिलाकर वार्ता के किसी नतीजे पर पहुंचने के आसार कम हैं। भारतीय किसान यूनियन (असली) अराजनैतिक के अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह कहते हैं कि सरकार से पहले दिन वार्ता का जो नतीजा था, वही आज भी है। मूल स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। हरपाल सिंह कहते हैं कि सरकार वार्ता के बहाने केवल टाल मटोल में लगी है।  

पंजाब के किसान नेता हरमीत सिंह कादियान के अनुसार सरकार की मंशा साफ नहीं है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल केवल किसानों से बात करने के लिए आते हैं। कादियान कहते हैं कि किसान हर बार उम्मीद लेकर वार्ता में शामिल होते हैं और खाली हाथ लौट आते हैं।

तीन कानूनों को रद्द करने के बजाय संशोधन की बात करें किसान

कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और वाणिज्य तथा रेल मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट कर दिया है कि केन्द्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने वाली नहीं है। किसानों को अपनी यह जिद छोड़ देनी चाहिए। तोमर का कहना है कि किसान तीनों कानूनों में खामियां बताएं और सरकार उस पर चर्चा करके उचित संशोधन करने के लिए तैयार है। एमएसपी पर खरीद की गारंटी जैसे अन्य सवाल पर भी केन्द्र सरकार किसानों से ही इसका विकल्प सुझाने की मांग कर रही है।

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सरकार के इस रुख में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया है। किसान संगठन और सरकार के सूत्र बताते हैं कि केन्द्र सरकार तीनों कानूनों में एक दर्जन से अधिक संशोधन करने के लिए तैयार है। हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि सरकार जिन संशोधनों पर तैयार हो रही है, उनसे किसान हित का कोई खास मकसद नहीं हल होने वाला। इसलिए जब कानून में खामियां हैं तो सरकार इसे रद्द ही कर दे। नए सिरे से कृषि हित में व्यापक चर्चा के साथ कानून लाए।

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