किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला से कहा, 'किसान आंदोलन को करीब 10 दिन से ज्यादा हो गए। सरकार को हम हमारी मांगें बता चुके हैं लेकिन केंद्र सरकार अब तक कोई फैसला नहीं ले पा रही है। इस सरकार में कोई मानवता नहीं है...
नए कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के नुमाइंदों के बीच छठे दौर की बैठक बुधवार को होने जा रही है। लेकिन अब तक किसान संगठनों ने केंद्र सरकार को एतराज वाले विवादित बिंदुओं की लिस्ट और अपने कोई ठोस सुझाव नहीं भेजे हैं।
किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला से कहा, 'किसान आंदोलन को करीब 10 दिन से ज्यादा हो गए। सरकार को हम हमारी मांगें बता चुके हैं लेकिन केंद्र सरकार अब तक कोई फैसला नहीं ले पा रही है। इस सरकार में कोई मानवता नहीं है आंदोलन में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी ठंड में परेशान हो रहे हैं। ये सरकार जल्द कुछ करने के मूड में नजर नहीं आ रही है। ये लोग जानबूझकर देरी कर रहे हैं।'
वह कहते हैं, 'सरकार के लोग ही एक बात को 50 बार बोल रहे हैं। नौ तारीख को होने वाली बैठक में हम 'यस या नो' में ही जवाब देंगे या फिर मौन ही रहेंगे। हम लोग अपनी पूरी बात विस्तार से सरकार के सामने रख चुके हैं। हर बैठक में मंत्री लोग केवल यही बताते रहते हैं कि काननू बहुत ही अच्छा है। और हमसे पूछते रहते हैं कि बताइए कानून में कहां दिक्क्त है।
इस तरह की चीजों से हम बहुत थक चुके हैं इसलिए हमने केंद्र को साफ कर दिया था कि हम कोई ओर बातें सुनना नहीं चाहते हैं। केवल मांगों पर 'यस या नो' सुनना चाहते हैं। आगे भी बैठक में यही रवैया होगा। सरकार जब भी कोई बैठक बुलाती है तो कोई एजेंडा देती है लेकिन आज तक सरकार ने कोई भी एजेंडा हम लोगों को नहीं दिया। अगर सरकार फिर आगे बैठक आगे बढ़ाती है तो हमारा आंदोलन भी आगे बढ़ता जाएगा।'
गौरतलब है कि केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली की सीमा पर कई दिनों से जमे हुए हैं। अब तक किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही है। अब नौ दिसंबर को विज्ञान भवन में सुबह 11 बजे छठे दौर की वार्ता होनी है।