चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया ब्याज माफ करने के मामले में हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई जारी रही। चीनी मिलों की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि सरकार द्वारा ब्याज माफ करने का निर्णय उचित है क्योंकि चीनी के दाम गिर गए हैं। गन्ने का समर्थन मूल्य भी काफी ज्यादा है इसलिए मिलों को घाटा हो रहा है। वह ब्याज की रकम का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं।
किसान मजदूर संगठन की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। चीनी मिलों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत ने कहा कि याचिका में कहा गया कि मिलें मुनाफा कमा रही हैं।
चीनी मिलों द्वारा उत्पादित अन्य उत्पादों शीरा, खोई, बिजली आदि से होने वाले मुनाफे से किसानों का कोई लेना देना नहीं है। गन्ना चीनी बनाने के लिए लिया जाता है, इसलिए किसानों को सिर्फ चीनी से होने वाली आय से ही मतलब है। कोर्ट ने गन्ना समितियों की ओर से अधिवक्ता रवींद्र सिंह को पक्ष रखने के लिए कहा था।