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बीजेपी को उसी के औजार से घेर रहे किसान संगठन, 63 गुट करेंगे सड़कों को जाम!

Sat, 10 Jun 2017 11:22 PM IST
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली।
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किसान संगठनों की बैठक - फोटो : amar ujala
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देशभर में आंदोलन की ताल ठोक रहे किसान नेताओं ने भाजपा को उसी के औजार से घेरने का निर्णय लिया है। किसान नेताओं ने आंदोलन के लिए उन्हीं तीन मुद्दों को अपनी मांग का प्रमुख मुद्दा बनाया है। जिसे भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने चुनाव घोषणापत्र में स्थान दिया था। आंदोलन से जुडे किसान नेता अब भाजपा को उसके अपने औजार से घेरते हुए उसे चुनावी घोषणा पत्र की याद दिला रहे हैं। 
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आंदोलन के जल्द थमने के नहीं हैं आसार 
किसान आंदोलन के जल्द थमने के आसार नहीं हैं। मध्यप्रदेश से शुरू हुआ यह किसान आंदोलन अब पूरे देश की ओर रूख कर रहा है। देशभर के किसान संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी प्रमुख तीन मांगों के पूरा होने तक आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया है। हालांकि किसान संगठनों का जोर आंदोलन को शांति पूर्ण ढंग से चलाने पर है। यह तय हुआ है कि हर किसान संगठन अपने आंदोलन की वीडियो रिकार्डिंग करवाएगा, ताकि बाहरी तत्व उसके आंदोलन का माहौल न बिगाडें। 

16 जून को सड़क जाम, 14 जून को काली पट्टी बांधेंगे किसान 
किसान आंदोलन को देशभर में फैलाने की कवायद में किसानों के 63 संगठन एकजुट हुए हैं। इन संगठनों ने तय किया है कि 14 जून को सभी किसान काली पट्टी बांधकर मांग मानने में हो रही देरी पर विरोध प्रकट करेंगे। किसान संगठन 15 जून को धरना प्रदर्शन करेंगे, और उसके अगले दिन 16 जून को देशभर में सड़क जाम करने का आह्वान किया है। सभी किसान संगठनों के नेता देश के अलग-अलग हिस्सों में 16 जून को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक सड़क जाम कर विरोध जताएंगे। सड़क जाम के बाद किसान संगठन आंदोलन की रणनीति को लेकर 18 जून के फिर से बैठक करेंगे।
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दिल्ली बनी किसान आंदोलन के रणनीति का केंद्र 
देश की राजनीति पर प्रभाव डालने के लिए किसानों ने राजनीति के केंद्र दिल्ली को ही अपनी रणनीति का केंद्र बनाया है। शनिवार को देशभर के 63 किसान संगठनों के प्रमुख नेताओं ने आंदोलन की अगली रणनीति बनाने के लिए राष्ट्रीय किसान महासंघ के नेतृत्व में गांधी शांति प्रतिष्ठान में अहम बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा उर्फ कक्का जी, गुरनाम सिंह चडूनी, राजस्थान के राम पाल जाट, बलवीर सिंह राजेवाल, नरेश सिरोही, राकेश टिकैत और सेतकरी संघ के राजू सेट्टी सरीखे किसान नेता प्रमुख रूप से उपस्थित हुए। इन नेताओं के अलावा देशभर के 63 किसान संगठनों के नेता शामिल हुए। कक्का जी शुक्रवार से ही दिल्ली में जमे हुए हैं। शुक्रवार को खबरिया चैनलों में मोर्चा संभालने के बाद उन्होंने शनिवार को देशभर से आए किसान नेताओं संग संयुक्त रणनीति पर चर्चा की। सूत्र बताते हैं कि शिवकुमार शर्मा भाजपा के एक पूर्व संगठन महामंत्री के संपर्क में भी हैं। भगवा चिंतक के रूप में पहचाने जाने वाले ये संगठन महामंत्री भी कक्का को आंदोलन की रणनीति बता रहे हैं। 

भाजपा पर नरम, पीएम मोदी पर गरम 
अपने मांगों को अनसुना किए जाने के वजह से आंदोलनरत्त किसान नेता पीएम मोदी पर गरम हैं, लेकिन भाजपा पर नरम दिखे। पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा उर्फ कक्का जी ने कहा कि पीएम मोदी किसानों के हितैषी नहीं हैं। लोकसभा चुनाव में किसानों को लेकर किया हुआ उन्होंने एक भी वायदा पूरा नहीं किया है। हालांकी पार्टी पर वे नरम दिखे। मोदी के अलावा उनके निशाने पर शिवराज रहे। कक्का के साथ अन्य नेता भी मौजूद थे। किसान नेताओं ने एकस्वर से मंदसौर गोली कांड की भर्तसना करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करते हुए सूबे में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। 

किसानों की तीन मांगों पर घिरी है पूरी भाजपा
भाजपा शासित सरकारों पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए किसान संगठनों ने अपनी ओर जिन तीन मांगों का जिक किया है। उनमें स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना, कृषि उत्पादों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित करने और किसानों को ऋण मुक्त करने की मांग है। दरअसल ये तीनों ही बातें भाजपा के 2014 के लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में शामिल हैं। स्वामीनाथन आयोग ने किसानों को फसल लागत मूल्य से 50 प्रतिशत ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य करने की सिफारिश की है। लंबे समय से यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास अमल के लिए लंबित है।
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