मध्यप्रदेश के मंदसौर में किसान रैली
साल 2017 में मध्यप्रदेश के मंदसौर में भी इसी तरह का एक किसान आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन में भी किसानों की मांगें कर्ज माफी और अपनी फसल का सही दाम हासिल करने की थी। कई दिनों तक यह आंदोलन चला जिसे तेजी से बढ़ता हुआ देखकर प्रशासन से मंदसौर समेत आस-पास के जिलों जैसे उज्जैन और रतलाम में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी थी। स्थिति तब बिगड़ गई जब पुलिस ने किसानों पर फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में 6 किसानों की मौत हो गई थी और बहुत से किसान बुरी तरह घायल हुए थे।
गोलियां चलने के बाद यह पूरा आंदोलन एक हिंसक प्रदर्शन में बदल गया था। फायरिंग से गुस्साए किसानों ने जगह-जगह तोड़फोड़ की और कई गाड़ियां जला डालीं थी। कई दिनों तक जिले में कर्फ्यू के हालात थे। इन सभी मामलों में किसानों को उनकी मांगों के एवज में आश्वासन दिए गए।
खोपड़ी के साथ तमिलनाडु के किसानों ने किया प्रदर्शन
अप्रैल 2017 में तमिलनाडु के हजारों किसान जंतर-मंतर पर अजीबो-गरीब वेश-भूषा के साथ प्रदर्शन किया। किसान खोपड़ी लेकर पहुंचे थे। किसानों ने 41 दिनों तक यहां प्रदर्शन किया था तब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री खुद किसानों से बात करने दिल्ली पहुंचे थे।
किसान नर खोपड़ियों के साथ प्रदर्शन किया और उन्होंने दावा किया था कि ये खोपड़ियां आत्महत्या करने वाले किसानों की हैं। फिर इन किसानों ने एक दिन अर्द्ध-नग्न होकर भी प्रदर्शन किया। भारी गर्मी में किसानों ने सड़क पर लेट कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों ने सिर के आधे बाल और आधी मूंछ कटाकर भी प्रदर्शन किया। खोपड़ी के साथ किसानों की तस्वीर इस आंदोलन की पहचान बन चुकी है।
किसानों की नौ सूत्री मांगे
बता दें कि किसान अपनी नौ सूत्री मांगों को लेकर दिल्ली की ओर बढ़े हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में स्वामिनाथन कमेटी के फॉर्मूले के आधार पर किसानों की आय सी-टू लागत में कम से कम 50 प्रतिशत जोड़ कर दिया जाए साथ ही सभी फसलों की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी दी जाए।
पिछले 10 सालों में आत्महत्या करने वाले लगभग 3 लाख किसानों के परिवार को मुआवजा के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। किसानों को सभी प्रकार के कर्ज से पूरी तरह माफ कर दिया जाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए।
इस योजना में किसानों को लाभ मिलने के बजाए बीमा कंपनियों को लाभ मिल रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में उपलब्ध कराई जाए। दिल्ली-एनसीआर में दस साल से ज्यादा पुराने ट्रैक्टरों पर रोक हटा दी जाए। किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बिना ब्याज लोन दिया जाए। महिला किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना अलग से बनाई जाए। चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपए प्रति किलो किया जाए और 7 से 10 दिन के अंदर गन्ना किसानों का भुगतान सुनश्चित किया जाए। आवारा पशुओं से किसानों के फसल को बचाने का इंतजाम किया जाए।