वहीं गुजरात के किसान संगठन गुजरात के खेदुत समाज के अध्यक्ष जयेश पटेल का कहना है कि 2014 में मोदी ने किसानों से वादा किया था कि अगर वे सत्ता में आए तो किसानों को लागत का 50 फीसदी देंगे। लेकिन सरकार ने धोखा करते हुए अनुमानित बढ़ोतरी कर दी है।
उन्होंने कहा कि हमें सी2+ एफएल+50 फीसदी (लागत+फैमिली लेबर) के मुताबिक कीमतें दी जाएं। उन्होंने कहा कि गुजरात में मोटा धान का आज का बाजार भाव 2,100 प्रति क्विंटल है, जबकि सरकार का एमएसपी रेट 1750 रुपए प्रति क्विटंल है। वहीं गुजरात में 2010-11-12 में कपास का रेट 6 से 8 हजार रुपए क्विंटल था, जो अब 5310 रुपए हो गया है।
सरकार के पास दाल खरीद का बजट नहीं
जयेश के मुताबिक गुजरात में मूंगफली का इस साल उत्पादन 32 लाख क्विंटल हुआ है, सरकार ने उसे 900 रुपए एमएसपी का रेट देते हुए 500 करोड़ रुपए का बजट रखा है। उन्होंने सवाल किया कि 500 करोड़ रुपयों में मात्र 5-6 लाख क्विंटल की ही खरीद हो सकती है। ऐसे में किसानों को कम कीमत में बाजार में मंगूफली बेचनी पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि आजतक सोयाबीन को एमएसपी रेट पर खरीदा ही नहीं गया, जबकि पहले सोयाबीन 5 हजार रुपए में बिक जाती थी, लेकिन अब 3 हजार में भी कोई लेने को तैयार नहीं है। कमोबेश यही हाल दालों का है और किसानों के घरों में दालों का स्टॉक पड़ा है, क्योंकि सरकार के पास खरीद का बजट ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर हम गुजरात के गांवों में जाने वाले हैं। सरकार किसानों को मात्र 8 घंटे ही बिजली दे रही है, यहां तक कि 31 मार्च के बाद सिंचाई का पानी किसानों की बजाय उद्योगों को दे दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मोदी से किसान इतना नाराज है कि भाजपा को इसका असर आगामी लोकसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है। जयेश के मुताबिक 2014 में भाजपा ने 26 सीटें जीती थीं, लेकिन किसानों की अनदेखी सरकार पर भारी पड़ सकती है और सरकार मात्र 13 सीटें ही इस बार निकाल पाएगी।
भारतीय किसान यूनियन भी शुरू करेगी पदयात्रा
वहीं भारतीय किसान यूनियन भी सरकार के एमएससपी के फॉर्मूले से सहमत नहीं है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बोला कि सरकार डिजिटल इंडिया से देश को जोड़ रही है, लेकिन किसानों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी घोषणाओं का पूर्ण रूप से अनुपालन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 23 सितंबर को हरिद्वार के चौधरी महेन्द्र सिंह किसान घाट से पदय़ात्रा शुरू करने वाले हैं, जो 2 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेगी। उन्होंने एलान किया किसान आंदोलन ने प्रधानमंत्री के दिमाग में 'किसान' शब्द घुसा दिया है, और चुनावों तक 'किसान' शब्द सरकार की डिक्शनरी से बाहर नहीं आने देंगे।