फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये हैं वो दल बदलू कद्दावर नेता जिन्होंने भाजपा लहर में थामा कमल का दामन

Sun, 15 Jul 2018 05:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : PTI
विज्ञापन

2019 लोकसभा चुनाव के मैदान में विरोधियों पर फतह हासिल करने के लिए भाजपा मजबूती के साथ उतरना चाहती है। पार्टी किसी भी हाल में संगठन को इतना मजबूत करना चाहती है जिसका असर जमीनी स्तर पर दिखे। 

विज्ञापन


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हर राज्य में मतदाताओं को खींचने के लिए मिशन 2019 की शुरुआत कर चुके हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का इस्तेमाल करके पार्टी 2014 की तरह ही मोदी लहर के दम पर वोटों की आंधी को अपनी तरफ करना चाहेगी। 

ये भी पढ़ें- केंद्रीय मंत्री ने दिया खुला आमंत्रण, भाजपा में शामिल हों और मुख्यमंत्री पद पाएं
विज्ञापन


हालांकि कई दलों के नेताओं का कहना है कि भाजपा अकेले के दम पर 2014 जैसा करिश्मा नहीं दिखा पाएगी। लेकिन 2014 के बाद भाजपा में कई ऐसे नेता शामिल हुए हैं जो पार्टी को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। मोदी सरकार के पांच साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले पार्टी में कई ऐसे नेता शामिल हो चुके हैं जो पार्टी को कई गुना मजबूत प्रदान कर सकते हैं।

आइए जानते हैं उन कद्दावर नेताओं के बारे में जो भाजपा में शामिल हुए और पार्टी को और ज्यादा मजबूत बनाने के लिए हर मोर्चे पर काम कर रहे हैं। 

1. एसएम कृष्णा

पूर्व विदेश मंत्री और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे एसएम कृष्णा ने कांग्रेस से ब्रेकअप करने के बाद 22 मार्च 2017 को भाजपा का हाथ थाम लिया था। भाजपा में शामिल होने के बाद कृष्णा ने कहा कि उन्होंने राष्ट्र की सेवा के लिए कांग्रेस का दामन छोड़ा है।

एस एम कृष्णा के भाजपा में शामिल होने से पार्टी कर्नाटक में अगली सरकार बनाने के अपने मिशन को आसानी से पूरा कर सकेगी। कृष्णा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए।  

2. रीता बहुगुणा जोशी

कांग्रेस से बगावत बहुगुणा परिवार की फितरत रही है। रीता बहुगुणा जोशी ने 20 अक्टूबर 2016 तो कांग्रेस छोड़कर इस विरासत को आगे बढ़ाया। यूपी में पहले सी ही खस्ताहाल चल रही कांग्रेस को छोड़कर उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था।

उनसे पहले उनके भाई विजय बहुगुणा ने कांग्रेस छोड़ी थी तभी से इसे बहुगुणा परिवार की तीसरी बगावत के तौर पर देखा गया। रीता के कांग्रेस छोड़ने को लोग चौथी बगावत के तौर पर ले रहे हैं।

यह भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर में फिर बन सकती है सरकार! पीडीपी के 18 विधायक भाजपा से हाथ मिलाने को तैयार


3. सतपाल महाराज

उत्तराखंड से कांग्रेस के दिग्गज नेता और पौड़ी गढ़वाल से सांसद सतपाल महाराज ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका है। सतपाल महाराज पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज चल रहे थे। बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने शुक्रवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सतपाल महाराज के बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की। 

4. मुकुल रॉय

कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नंबर दो रहे मुकुल रॉय भाजपा में शामिल हो चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी से दूरी बढ़ने के बाद उन्होंने टीएमसी का सालों पुराना साथ छोड़ दिया। 

5. नरेश अग्रवाल

समाजवादी पार्टी में अहम स्थान रखने वाले नेता नरेश अग्रवाल ने भाजपा का दामन थाम लिया। दिल्ली में भाजपा के कार्यालय में नरेश अग्रवाल वरिष्ठ बीजेपी नेताओं के बीच पार्टी में शामिल हुए थे। नरेश अग्रवाल का सपा ने राज्यसभा का टिकट काट दिया था। इस बात से नरेश अग्रवाल नाराज थे।


ये भी पढ़ें- ‘भोजपुरी क्वीन’ कल्पना पटवारी भाजपा में शामिल, करेंगी राजनीतिक पारी की शुरुआत

6. नारायण दत्त तिवारी

यूपी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी ने नई पारी की शुरुआत की है। जीवन के नौ दशक पूरे कर चुके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एन.डी. तिवारी अपने बेटे रोहित शेखर के साथ भाजाप में शामिल हो गए हैं। दोनों को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने आवास पर पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले दोनों नेता भाजपा में शामिल हुए।

7. हेमंत विश्व शर्मा

साल 2016 के असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय में चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी छोड़कर भाजपा में गए हेमंत विश्व शर्मा की भूमिका महत्वपूर्ण थी, जिन्हें जनसंपर्क और प्रबंधन में माहिर माना जाता है और भाजपा ने उन्हें चुनाव प्रचार की कमान सौंपी थी। पार्टी ने हालांकि मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार सर्वानंद सोनोवाल को घोषित किया था। 

8. चौधरी वीरेंद्र सिंह

हरियाणा में भी चुनाव से ठीक पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जीत का एक बड़ा फार्मूला निकाल था। उन्होंने यहां पार्टी के साथ चौधरी वीरेंद्र सिंह के रूप में एक बड़ा जाट चेहरा जोड़ा। शाह से मुलाकात के बाद चौधरी वीरेंद्र सिंह भाजपा में शामिल हुए। किसी भी दिन इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है।

विज्ञापन

बड़ी जीत हासिल करने के लिए सहयोगियों की जरूरत

नेताओं के दल-बदल का सिलसिला तो भारतीय राजनीति का मुख्य बिंदू रहा है लेकिन किसी भी दल को एक बड़ी जीत हासिल करने के लिए सहयोगियों की जरूरत होती है। और यह बात तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब भारत जैसे देश में क्षेत्रीय दलों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 

बात करें 40 सीटों वाले बिहार की तो यहां भाजपा को यहां नीतीश की जेडीयू और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) का समर्थन हासिल है। हालांकि सीटों कौन सा दल कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा यह अभी साफ नहीं हो सका है। 

ये भी पढ़ें- कुरुक्षेत्र: चुनावी वैतरणी में क्या एनडीए की हिंदुत्व की नाव पर सवार रहेंगे नीतीश कुमार

वहीं बात करें जम्मू-कश्मीर की तो यहां 2019 से पहले भाजपा ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया। माना जा रहा था कि दोनों दल 2019 तक इस गठबंधन को बरकरार रखेंगे लेकिन भाजपा के पैर पीछे खींच लेने के बाद 2019 में जम्मू-कश्मीर में भाजपा किसके साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी यह अभी साफ नहीं हो सका है।

ऐसा ही कुछ हाल महाराष्ट्र में भी है। यहां भाजपा की मुख्य सहयोगी रही शिवसेना भी अपने कड़े तेवर दिखाते हुए 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले शिवसेना के अलग होने का एलान कर चुकी है। यहां भी सीटों के बंटवारे और कौन बड़े भाई के भूमिका में होगा इसपर पेंच फंसा हुआ था।

वहीं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के संस्थापक और सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण राज्य मंत्री रामदास अठावले ने भी भाजपा को तेवर दिखाए हैं। आरपीआई का कहना है कि 2019 में भाजपा का साथ बरकरार रहेगा लेकिन हमें भी इसके बदले उतना फायदा मिलना चाहिए जितना भाजपा को हमारा हाथ थामने से होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें