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कृषि कानूनों के विरोध में केंद्र के साथ लंबी चलेगी किसानों की टकराहट, 'दिल्ली चलो' का एलान

Tue, 29 Sep 2020 08:08 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पंजाब के किसान संगठनों से रेल रोको का आह्नान, छह अक्टूबर को हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के घर के सामने धरना व उनके इस्तीफे की मांग और कर्नाटक के किसान संगठनों से केंद्र व राज्य सरकार के किसान विरोधी आंदोलनों द्वारा रोक की अपील की जाएगी...
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कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन करते किसान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच अब सीधा टकराव होने जा रहा है। एआईकेएससीसी ने मंगलवार को ऐलान कर दिया है कि किसानों के तीन काले कानूनों को लेकर चल रही टकराहट अब लंबी होने जा रही है। चरणबद्ध तरीके से देश के विभिन्न भागों में प्रदर्शन होंगे। देशभर के किसान 26-27 नवम्बर को ‘दिल्ली चलो’ में शामिल होंगे। एआईकेएससीसी के पदाधिकारी योगेंद्र यादव ने कहा, 2 अक्टूबर से देशभर में किसानों के बड़े विरोध अभियानों की शुरुआत की जाएगी।

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योगेंद्र यादव और सरदार वीएम सिंह के अनुसार, एआईकेएससीसी के आह्वान पर देशभर के किसानों, कृषि मजदूरों, व आमजनों ने 25 सितम्बर के ऐतिहासिक भारत बंद में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। केंद्र सरकार के किसान विरोधी व जन-विरोधी कानून और नीति के विरुद्ध लोगों में भारी गुस्सा देखा गया। इतिहास में पहली बार देश भर के किसानों ने केंद्रीय कानून पारित होने के पांच दिन के अंदर इतने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया है।

यह तत्कालिक विरोध किसानों के जीवन व जीविका पर हो रहे आघात के विरुद्ध, किसानों के गुस्से की झलक 20 राज्यों में प्रदर्शित हुई है। एआईकेएससीसी से सम्बद्ध संगठनों ने ‘चक्का जाम’ धरना और कानून की प्रतियां जलाकर 10 हजार से ज्यादा स्थानों पर करीब 1.5 करोड़ किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की। बंद के असर से यह साफ हो गया है कि देश के किसानों ने केंद्र सरकार के इन तीन काले कानूनों को नकार दिया है।
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केंद्र सरकार इन तीन किसान विरोधी कानूनों एमएसपी/सरकारी खरीद पर गलत जानकारियां दे रही है। एआईकेएससीसी के सदस्यों ने कहा कि वे किसानों के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए इन कानूनों को अमल नहीं होने देंगे। एआईकेएससीसी राज्य विधान सभाओं से अपील करती है कि वे प्रस्ताव पारित कर घोषित करें कि क्योंकि यह देश के संघीय ढांचे पर और किसानों के अधिकारों पर गंभीर हमला हैं, इसलिए वे इसे अमल नहीं करेंगी।

इसके अलावा एआईकेएससीसी की बहुत सारी राज्य इकाईयों ने गांव से ब्लाक स्तर तथा मंडियों में विरोध सभाएं सम्मेलन आयोजित कर केंद्र सरकार द्वारा किसानों पर किए जा रहे हमले पर शिक्षित करने, सरकार के धोखे को उजागर करने, क्रमिक व नियमित भूख हड़तालें चलाने, आदि का निर्णय लिया है। एआईकेएससीसी अपनी राज्य इकाइयों और विभिन्न संगठनों के साथ समन्वय करते हुए पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश तथा कर्नाटका, तमिलनाडु व तेलंगाना के आन्दोलनों के साथ भी समन्वय करते हुए आन्दोलन के आगे के कदमों की घोषणा करेगी।

पंजाब के किसान संगठनों से रेल रोको का आह्नान, छह अक्टूबर को हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के घर के सामने धरना व उनके इस्तीफे की मांग और कर्नाटक के किसान संगठनों से केंद्र व राज्य सरकार के किसान विरोधी आंदोलनों द्वारा रोक की अपील की जाएगी। दो अक्टूबर को देशभर के किसान उन पार्टियों व जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार का संकल्प लेंगे, जिन्होंने इन किसान विरोधी कानूनों का विरोध नहीं किया है।

केंद्र सरकार के किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ गांव सभा के प्रस्ताव अपनाएंगे। 14 अक्टूबर को देश के किसान एमएसपी अधिकार दिवस के रूप में मनाएंगे। सरकार के इस झूठ का खुलासा करेंगे कि किसानों को स्वामीनाथन आयोग के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल रहा है। ये सभी विरोध एक राष्ट्रीय विरोध के रूप में 26 व 27 नवम्बर, 2020 को दिल्ली में संगठित होंगे।

एआईकेएससीसी का कहना है कि वे केंद्र सरकार को, किसानों के भविष्य व जीविका पर किए जा रहे अमानवीय हमले को वापस लेने के लिए मजबूर करेंगे। एआईकेएससीसी का संकल्प है कि जब तक देश के किसान नहीं जीत जाते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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