सीएम मनोहर लाल ने कहा, सरकार के 600 दिन पूरे हो गए हैं। हमारे विपक्षी हमसे सालों के हिसाब पूछते हैं, लेकिन हम सालों तक नहीं, बल्कि दिनों का भी हिसाब बता सकते हैं। कोरोना महामारी का मुकाबला बड़ी चुनौती थी। हमसे जो बेहतर हो सका, वह हमने किया है। इस दौरान जनहित के काम करने से भी हम पीछे नहीं हटे। पहली सरकारों के मुकाबले हमने डबल काम किया है। हमारे अधिकारियों ने नीति के तहत काम को सिरे चढ़ाया। हम 11 फसलों की खरीद कर रहे हैं। 1700 से 1800 करोड़ रुपये फसल खरीद के लिए सीधे किसानों के खाते में डाले गए हैं। रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा-पंजाब से जुड़ा एसवाईएल मुद्दा उठाया था। इसके 24 घंटे के भीतर शुक्रवार को मुख्यमंत्री केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात करने पहुंच गए। विपक्ष ने कहा था, आपने और आपके उप मुख्यमंत्री, दुष्यंत चौटाला ने इतना विकास करवाया है कि हरियाणा के लोग, आप जहां जाते हैं, वहां से तत्काल भगा देते हैं। क्या विकास की ओवरडोज तो नहीं हो गई है।
चुनाव से पहले दुष्यंत कहते थे 'अबकी बार, भाजपा यमुना पार'। लोग उनसे पूछेंगे कि वे गत चुनाव में भाजपा को इतनी दूर छोड़ने की बात कह रहे, लेकिन चुनावी नतीजे आने के बाद वे अपनी पार्टी के साथ खुद ही भाजपा सरकार में शामिल हो गए। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मनोहर लाल ज्यादा चिंतित इसलिए भी नहीं हैं कि प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके खिलाफ उस तरह से मैदान में नहीं आ रहे हैं, जैसे एक विपक्षी दल के नेता को आना चाहिए। वे सोशल मीडिया पर या प्रतीकात्मक तौर से ही मनोहर लाल का विरोध करते हैं। किसान आंदोलन से उनकी दूरी जग जाहिर है। मनोहर लाल को उम्मीद है कि चुनाव तक सब ठीक हो जाएगा। वे यह भी जानते हैं कि लोग जितना दुष्यंत चौटाला के खिलाफ हैं, उतना उनसे नहीं हैं। दुष्यंत चौटाला की पार्टी का जनाधार ही किसान रहे हैं। इसके बावजूद आज चौटाला उनके साथ नहीं हैं। चुनाव में जब यह बात उठेगी तो दुष्यंत को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। रणदीप ने कहा, हरियाणा में हर कोने, हर मोड़ पर, हर कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर क्यों है। हरियाणा की सरकार घरों के अंदर खुद ताला लगाकर बंद क्यों हो गई है। यहां पर रणदीप का मतलब है कि सरकार के मंत्री या विधायक जहां भी जाते हैं, किसान उन्हें काले झंडे दिखा रहे हैं।