सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाकर गतिरोध दूर करने के इरादे से किसान आंदोलन से जुड़े मसले के हल के लिए जो कमेटी बनाई है, उससे बात के लिए आंदोलनकारी किसान तैयार नहीं हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने दो टूक कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बनाई गई कमेटी की किसी बातचीत में वे शामिल नहीं होने जा रहे हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि उनका तीनों कानूनों की वापसी के लिए संघर्ष जारी रहेगा। वे पहले दिन से ही कमेटी के खिलाफ हैं। हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा 15 जनवरी को सरकार से होने वाली नौवें दौर की वार्ता में शामिल होने जा रहा है। सरकार से ही कानून वापसी की प्रक्रिया और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी पर चर्चा होगी।
कमेटी के सामने पेश नहीं होंगे
संयुक्त किसान मोर्चा की दलील है कि वह न तो खुद सुप्रीम कोर्ट गए थे और न ही वह ऐसी किसी कमेटी के पक्ष में हैं। क्रांतिकारी किसान यूनियन के डॉ. दर्शनपाल का कहना है कि संसद से बने कानून के विरोध में उनकी लड़ाई सरकार से है और वह सरकार से ही फैसला चाहते हैं। ऐसे में बाहर की किसी कमेटी के सामने पेश होकर पक्ष रखने का सवाल ही नहीं उठता है।
भाकियू डकौंदा के मंजीत धनेर ने कहा कि लोहड़ी में कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर पंजाब-हरियाणा समेत देश में विरोध जताया जाएगा। 15 जनवरी की वार्ता और सोमवार की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर रहेगी। 15 की वार्ता के बाद संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक के बाद अगली रणनीति का एलान होगा। कानून वापसी तक पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है।
कमेटी के भरोसे पर भी सवाल
भाकियू डकौंदा के मंजीत धनेर का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की बनाई गई कमेटी के सभी सदस्य पहले से सरकार के पक्षधर हैं। इन पर भरोसा भी नहीं। कमेटी में भाकियू के एक नेता के शामिल होने पर उन्होंने कहा, 1984 से पंजाब वाकिफ है। उन्होंने अंदेशा जताया कि सरकार ने कमेटी के जरिये आंदोलन को भटकाने और किसान संगठनों के बीच टूट की कोशिश की है, जो कामयाब नहीं होगी।
डॉ. दर्शनपाल कहते हैं कि बार-बार यह दर्शाने की कोशिश की जा रही है कि हम गणतंत्र दिवस समारोह में खलल डालने या बजट सत्र से पहले संसद पर कब्जा जमाना चाहते हैं। यह गलत है। सुप्रीम कोर्ट में भी खानपान, फंडिंग, सियासी कनेक्शन और खलिस्तान को लेकर सवाल उठाकर चर्चा की गई। आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशें जारी हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखने की अपील की। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी फिलहाल गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। अब 15 जनवरी को सरकार से होने वाली वार्ता और सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।