क्षेत्र के बरईपार गांव निवासी किसान राजेंद्र यादव के बेटे सतीश यादव ने सड़े आलू से बिजली पैदा की। उसने बीएचयू और फिर चेन्नई में इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च के वैज्ञानिकों के सामने बल्ब जलाकर दिखाया। रिसर्च सेंटर के निदेशक ने उसको इस बाबत प्रमाणपत्र भी दिया।
सतीश अपनी सफलता का श्रेय सर्वोदय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य सुधाकर उपाध्याय को देता है, जिन्होंने उसकी हौसला अफजाई के साथ-साथ मदद भी की।
सतीश ने अपने प्रोजेक्ट के बारे में अमर उजाला को बताया कि वह सर्वोदय इंटर कालेज शाहपुर में पढ़ रहा था। साथ ही साथ किशुनी पुर में कोचिंग में भी क्लास लेता था । वहीं के शिक्षक राकेश यादय ने कुछ अलग करने की प्रेरणा मिली।
12 जुलाई 2014 को उसकी मां फूलदेई ने घर में रखे सड़े आलू फेंकने को दिए। वह आलू फेंक कर वापस आ रहा था कि अचानक उसकी अंगुली होठों पर पड़ने से कुछ अम्लीय स्वाद महसूस हुआ।