बजट में किसान-मजदूरों के लिए केंद्र सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं की। 2 हेक्टेयर तक की जोत वाले किसानों को हर साल 6 हजार रुपए, किसानों की कर्जमुक्ति के लिए 1 दिसंबर 2018 से इंटरेस्ट सबवेंशन और रिपेमेंट स्कीम लागू करने आदि लाभों से इतर किसान नेता संतुष्ट नहीं हैं।
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस बजट पर असंतुष्टि जताई है। अमर उजाला के साथ बजट पर चर्चा के दौरान उन्होंने पूर्ण कर्जमाफी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए उन्हें 25 हजार रुपए प्रति एकड़ की उम्मीद थी।
पीयूष गोयल द्वारा बजट सत्र के दौरा पीयूष गोयल द्वारा 22 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुणा कर देने की बात पर टिकैत ने बिहार दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि मूंग-मसूर महज 33 रुपए प्रति किलो बेचनी पड़ रही है।
अमर उजाला डॉट कॉम के संपादक जयदीप कर्णिक ने जब उनसे किसानों के बिचौलिये और बाजार का शिकार बनने और ऐसे सिस्टम का हिस्सा बनने को लेकर सवाल उठाया तो टिकैत ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाए जाने की मांग की।
जयदीप कर्णिक ने कहा कि क्या कर्जमाफी सही रास्ता है, क्योंकि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कर्जमाफी सही रास्ता नहीं है। इस पर किसान नेता ने कहा कि 20 साल में 24 लाख किसानों ने आत्महत्याएं की। हालांकि सरकारी आंकड़ें कुछ और हैं।
किसान नेता ने कहा कि एक बार तो पूरी कर्जमाफी हो। सवाल उठाया कि कर्ज हो क्यों रहा है बार—बार? यह नहीं होना चाहिए और इसके लिए यह सुनिश्चित होना चाहिए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानून बने।