जैविक खेती की ओर किसानों का ध्यान
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रासायनिक खादों से किसानों का मोह अब भंग होने लगा है। वे अब जैविक खाद के दम पर खेती करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जिले में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में तेजी से गिरावट आई है। सरकारी प्रयासों व किसानों के संकल्प की बदौलत इस साल ढाई हजार एकड़ में जैविक खेती शुरू की गई है। जैविक खेती को जोखिम भरा मानकर किसान खुद को अकेला महसूस न करें, इसके लिए समूह आधारित प्रणाली अपनाई गई है।
अभी तक जिले में चुनिंदा किसान ही जैविक खेती कर रहे थे। लेकिन इस बार जिले के 2500 किसानों ने इसे अपनाया है। इनमें से हर एक की एक-एक एकड़ जमीन पर जैविक खेती की जा रही है। ढाई हजार एकड़ जमीन के लिए जैविक खाद की कमी न पड़े, इसके लिए सभी वर्म कंपोस्ट तैयार करेंगे। कृषि विभाग इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र पर प्रशिक्षण दे रहा है। 1700 किसानों ने प्रशिक्षण पूरा भी कर लिया है।
जैविक खेती का तेजी से प्रचार प्रसार हो इसके लिए जिले के सभी 12 ब्लाक में जैविक खेती के क्लस्टर बनाए गए हैं। एक क्लस्टर में 50 किसान शामिल हैं। सबसे अधिक दस क्लस्टर अतरौली ब्लाक में हैं। कृषि विभाग के बीते चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूरिया की बिक्री में तेजी से गिरावट आई है। 2012-13 में अलीगढ़ में 83,302 मीट्रिक टन यूरिया का उठान हुआ।
2013-14 में 80,199 मीट्रिक टन जबकि 2014-15 में यह घटकर 74,704 मीट्रिक टन पर जा पहुंचा। वर्ष 2015-16 में मात्र 64,298 मीट्रिक टन यूरिया की खपत दर्ज की गई। इसी तरह डीएपी की खपत 2014-15 में 48,532 मीट्रिक टन जबकि 2015-16 में 39,759 मीट्रिक टन रही।