उत्तर प्रदेश में किसान कर्जमाफी के फैसले के बाद महाराष्ट्र में भी किसानों के कर्ज माफी की तैयारी की जा रही है। अब तक किसान कर्जमाफी को लेकर ढुलमुल नीति अपना रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के वित्त सचिव को यूपी के किसान कर्जमाफी पैकेज का अध्ययन करने का आदेश दिया है। वित्त सचिव यूपी के पैकेज का अध्ययन कर बताएंगे कि महाराष्ट्र में इस पर किस तरह अमल किया जा सकता है।
महाराष्ट्र में बढ़ती किसान आत्महत्या के चलते कर्जमाफी की मांग काफी समय से उठती रही है। इस बार महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र से ही यह मुद्दा अहम रहा है जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित होती रही है। सरकार में सहयोगी शिवसेना भी किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर विपक्षी दल कांग्रेस-एनसीपी को समर्थन दिया है।
इससे फडणवीस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष ने राज्यव्यापी संघर्ष यात्रा निकालकर सरकार पर दबाव बनाया है। वहीं, विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने दावा किया है कि इस सत्र के दौरान 100 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
बुधवार को जब विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी दल कांग्रेस-एनसीपी के विधायक विधानभवन की सीढ़ियों पर बैठकर किसान कर्जमाफी की मांग करने लगे। वहीं, शिवसेना ने विधानसभा के अंदर अपनी आवाज बुलंद की।
शिवसेना के विधायकों ने मांग की कि यूपी के मुख्यमंत्री ने दिखा दिया कि कर्ज माफ करना महज चुनावी जुमला नहीं है। इसलिए फडणवीस से अपील है कि आदित्यनाथ योगी के पदचिन्हों पर चले और महाराष्ट्र में भी कर्ज माफी का ऐलान करें।
सदन में किसान कर्जमाफी पर चर्चा के दौरान भाजपा के युवा विधायक प्रशांत बंब ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि किसानों को कर्जमाफी नहीं चाहिए बल्कि उनके कर्ज की रकम सीधे किसानों के खाते में जमा किया जाए।
मामला बिगड़ता इससे पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों के साथ है। वित्त सचिव को यूपी में किसान कर्जमाफी के मॉडल का अध्ययन करने को कहा है। फडणवीस ने कहा कि यूपी सरकार ने कर्जमाफी कैसे दी।
इतने पैसे कहां से लाएंगे। इसका विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। हालांकि उन्होंने किसान कर्जमाफी की कोई डेडलाईन तय नहीं की है लेकिन संकेत दिया है कि महाराष्ट्र की सरकार भी योगी सरकार की तरह किसान कर्जमाफी के लिए गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है।