सिंघु बार्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में सभी लोग अपने तरीकों से किसानों की मदद कर रहे हैं। आंदोलन में बच्चे, युवा और महिलाएं भी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं। अपने परिवार के साथ आंदोलन में पहुंच रहे बच्चे किसानों की मांग और नारों के बीच समय निकालकर ऑनलाइन पढ़ाई भी कर रहे हैं और परिवार वालों के साथ लंगर में सेवा भी दे रहे हैं।
चंडीगढ़ में रहने वाली तीसरी कक्षा की छात्रा तनमीत कौर इन दिनों सिंघु बार्डर पर अपनी मां के साथ किसानों की मदद में लगी हुई है। तनमीत ने अमर उजाला को बताया कि सुबह उठकर वह अपने परिवार के लोगों के साथ किसानों की मदद करती है। लंगर में सेवा देती है। इसके बाद दिन के समय में अपने टेंट जाकर ऑनलाइन पढ़ाई भी करती है। करीब आठ दिन से वे अपने परिवार के साथ है।
तनमीत की मां रतिंदरबीर कौर ने अमर उजाला से कहा कि हम लोग यहां किसानों की मदद के लिए आए हैं। कोशिश यही होगी कि अन्य दिनों में अपने काम कर शुक्रवार से रविवार तक यहां रहें और किसानों आंदोलन में शामिल हों। बच्चे भी हमारे साथ किसानों की सेवा में जुटे हुए हैं।
दिन में पढ़ाई और रात में लंगर में मदद
गुरदासपुर के रहने वाले हरदीप सिंह ने अमर उजाला को बताया कि सुबह के दौर में वे प्रदर्शन मे अपने परिवार के साथ शामिल होते हैं। इसके बाद अपने जत्थे में ऑनलाइन क्लास में शामिल होते हैं। कभी कभी ऑनलाइन क्लास छूट भी जाती है, तो वो वाईफाई की मदद से डाउनलोड कर शाम में पढ़ाई करते हैं। रात के समय में लंगर में सेवा देते हैं।
हरदीप बताते हैं कि बीते पांच दिनों से यहीं हैं, लेकिन ऐसी कोशिश करेंगे कि हर शुक्रवार से लेकर रविवार तक यहीं रहें और आंदोलन में परिवार और किसानों का साथ दें।
नेट की दिक्कत के कारण होती है परेशानी
हरियाणा से आए कक्षा 8 वीं के छात्र अमरेंद्र ने बताया कि वह अपने पिता और काका के साथ आंदोलन में आया हुआ है। कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं, इसलिए ऑनलाइन क्लास चल रही है। दोपहर में ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ाई करता हूं, लेकिन कई बार नेट की दिक्कत के चलते पूरी क्लास छूट जाती है। गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे किसानों का आंदोलन 25वें दिन भी जारी है। कड़ाके की ठंड में भी किसानों ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद किए हुए हैं। सरकार बार-बार किसानों से चर्चा के जरिए हल निकालने की बात कह रही है।